रायगढ़

श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा में कृष्ण जन्मोत्सव ने बदली देवार पारा , तेंदू डीपा की तस्वीर

रायगढ़, 15 जनवरी माघ कृष्ण पक्ष 2026 तिथि द्वादशी गुरूवार को तेंदू डीपा देवार पारा में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा मैं राम कथा एवं कृष्ण जन्मोत्सव की लीलाओं पर रायगढ़ ही नहीं अपितु पूरे छत्तीसगढ़ के प्रकांड कथा वाचकों के सशक्त हस्ताक्षर पंडित श्री श्री भारत भूषण शास्त्री जी के अमृत वचनों के द्वारा सर्वप्रथम वामन अवतार के लीलाओं की विस्तृत कथा के माध्यम से लोगों को भगवान विष्णु की लीलाओं से मंत्र मुग्ध कर दिया , तो दूसरी ओर श्री राम कथा का वाचन जब व्यास पीठ पर बैठे परम पूज्य शास्त्री जी द्वारा किया गया तो सारा पंडाल जैसे स्तब्ध सा हो गया। इस कथा के अंतर्गत भरत को राजगद्दी और श्री राम को 14 वर्ष का वनवास का प्रसंग जब उन्होंने अपने मधुर वाणी से सुनाना प्रारंभ किया तो पंडाल में बैठे भक्तों की आंखें स्वत ही सजल हो गई।
व्यास पीठ पर बैठे शास्त्री जी के कथा वाचन की ऐसी शैली और उसके प्रभाव से मानो ऐसा लग रहा था की पूरा पंडाल जैसे सतयुग की यात्रा कर रहा हो।
इतना ही नहीं श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा के चौथे दिन की अद्भुत और अकल्पनीय पल वह रहा जब व्यासपीठेश्वर ने श्री वासुदेव के विवाह और तत्पश्चात लीलाओं के अगले क्रम में श्री कृष्ण जन्मोत्सव की कथा का वाचन प्रारंभ किया ।

जैसी ही श्री वासुदेव और देवकी के आठवें संतान के जन्म की कथा प्रारंभ की , व्यास पीठ की दाहिनी और बैठे विभिन्न वाद्य कलाकारों ने अपने वाद्य यंत्रों से ऐसी गर्जना प्रारंभ की, कि मानो बादल फटकार पूरे वातावरण को जलमग्न करने पर आतुर हो गई हो, और उसी समय पंडाल के बाहर से श्री वासुदेव बाबा अपनी आठवीं संतान श्री कृष्ण को सजी-धजी टोकरी में डाल अपने माथे पर लिए, गले से ऊपर यमुना के जल को पार करते हुए चले आ रहे हैं, इस दृश्य ने पूरे पंडाल को कौतूहल से भर दिया, और लोगों ने फूलों की वर्षा करनी और अपने चहेते श्री कृष्ण के जयकारे लगाने प्रारंभ कर दिए।


पंडाल में बैठी महिलाएं अपनी मातृत्व भरी नैनों से एक टक जहां अपनी लल्ला को निहारती रही , वहीं दूसरी ओर अपने मृत्यु लोक से मुक्ति पाने के लिए उनका आशीर्वाद लेने के लिए आतुर होती रही।
इस पवित्र आयोजन के जजमान सुदेश लाला और उनकी पत्नी चंद्रकांता लाला अपनी नम आंखों से जहां एक और अपने लल्ला को निहारते रहे वहीं दूसरी ओर नाचते हुए उनका स्वागत करते रहे ।

इस अंचल में प्रथम बार इतने भाव से और इतनी भक्ति पूर्ण वातावरण में श्रीमद् भागवत कथा की जानकारी प्राप्त होने के बाद रायगढ़ शहर की दो जानी-मानी हस्ती श्री बलबीर शर्मा जी और श्री बसंत गिरी गोस्वामी जी अपने आप को रोक नहीं सके और कथा स्थल पर पहुंचकर कृष्ण जन्मोत्सव का भरपूर भक्तिमय आनंद प्राप्त किया।

इस कृष्ण जन्म उत्सव में श्री वासुदेव की भूमिका श्री समीर गुप्ता और यशोदा की भूमिका उनकी पत्नी श्रीमती सोनू गुप्ता ने निभाई।
अतिथियों के सम्मान की जिम्मेदारी श्री रामा जयसवाल ने अपनी विनम्रता से पुरी की, और श्री वंश अरोड़ा ने अपने मधुर कंठो से भजनों की झड़ी लगाकर इस भक्ति रस में डूबे माहौल में चार चांद लगाने का काम किया।
व्यास पीठ पर बैठे पंडित श्री श्री भारत भूषण शास्त्री ने जहां एक और कथा वाचन की भक्ति पूर्ण जिम्मेदारियो का निर्वहन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आज उन्होंने अचानक ही इस पूरे आयोजन मैं अपनी छोटी सी भूमिका निभाने वाले विमल चौधरी की तारीफ करते हुए उनकी माता श्रीमती इंदिरा चौधरी और पत्नी श्रीमती रानी चौधरी को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया।
आज की कथा कृष्ण जी की बाल लीला, गोवर्धन लीला और नंद उत्सव पर आधारित रहेगी।





















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