Raigarh News : डिग्री कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान आयोजित.. बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक एवं जर्मनी से कैटरीन क्रेमर हुईं शामिल.. रायगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति रहे मुख्य अतिथि.. हिंदी विभाग और देवम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित

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रायगढ़ टॉप न्यूज 28 जनवरी 2023। शहीद नन्दकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ से सम्बद्ध जिले के किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान अग्रणी महाविद्यालय रायगढ़ छत्तीसगढ़ के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग एवं देवम फाउंडेशन बुल्गारिया यूरोप के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। निराला जयंती एवं बसंत पंचमी के शुभ अवसर के उपलक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ललित प्रकाश पटेरिया एवं प्रमुख वक्ता के रूप में सोफिया विश्वविद्यालय बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, जर्मनी से हिन्दी प्रोग्रामर कैटरीन क्रेमर एवं राजेंद्र महाविद्यालय छपरा बिहार से डॉ. बी.एस. साहू एवं दुर्ग विश्वविद्यालय कला संकाय के डीन डॉ. अभिनेष सुराना उपस्थित हुए। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत माता सरस्वती और निराला जी के छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर की गई।

 

तत्पश्चात निराला द्वारा रचित सरस्वती वंदना ‘वर दे वीणा वादिनी वर दे’ एवं छत्तीसगढ़ी सरस्वती वंदना का स्वर गायन बी.एससी प्रथम वर्ष की छात्रा ईशा यादव द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्नातकोत्तर हिंदी की छात्राओं सुधा शर्मा, प्रियंका तिवारी, वैभवलक्ष्मी, प्रेमा, मोनिका ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। आयोजन में उपस्थित मुख्य अतिथि एवं सम्मानित अतिथियों को बैच लगाकर व पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। उद्घाटन सत्र की इस कड़ी में सर्वप्रथम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पवन अग्रवाल ने अपना स्वागत उद्बोधन किया। उन्होंने कहा की स्नातकोत्तर हिंदी विभाग द्वारा आयोजित यह अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान माला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निराला जैसे महाकवि के रचना संसार पर आधारित इस व्याख्यान माला में अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों के साथ जुड़कर हर्ष का अनुभव हो रहा है। जर्मनी, बुल्गारिया, लंदन जैसे यूरोपीय देशों के प्रतिष्ठित विद्वानों का महाविद्यालय के कार्यक्रम में जुड़ना हमारे लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है। उन्होंने महाविद्यालय परिवार की ओर से सभी का स्वागत अभिनंदन किया।

तत्पश्चात हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मीनकेतन प्रधान ने इस अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने व्याख्यान के विषय ‘सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला : एक अपराजेय व्यक्तित्व’ पर समग्र रूप अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महाप्राण निराला का जीवन ही उनका रचना संसार भी है। उन्होंने जो कुछ जिया जैसे जिया उसकी ही अभिव्यक्ति उनकी रचनाओं का मूल प्रतिपाद्य है। राम की शक्तिपूजा, सरोज स्मृति, तोड़ती पत्थर जैसी रचनाओं का का संदर्भ देकर उन्होंने निराला के साहित्यिक प्रदेय पर प्रकाश डाला। इस आयोजन में ख्यातिलब्ध राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं के जुड़ने से विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलने की बात कही। तत्पश्चात आयोजन के मुख्य अतिथि डॉ. ललित प्रकाश पटेरिया जी का उद्बोधन हुआ। उन्होंने अग्रणी महाविद्यालय और विशेषकर हिन्दी विभाग को इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएँ दी तथा आमंत्रित वक्ताओं का अभिनन्दन किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि हिन्दी विभाग द्वारा पूर्व में भी इस प्रकार के महत्वपूर्ण आयोजन किये गए हैं विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि निरन्तर ऐसे ऐसे आयोजन यहाँ होते रहते हैं जिससे विद्यार्थी वर्ग लाभान्वित हो रहा है। मुख्य अतिथि के उद्बोधन पश्चात उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया इस प्रकार उद्घाटन सत्र पूर्ण हुआ और इसके बाद तकनीकी सत्र प्रारम्भ हुआ। तकनीकी सत्र में सर्वप्रथम सोफिया विश्वविद्यालय बुल्गारिया के इंडोलॉजी विभाग में पदस्थ डॉ. मौना कौशिक का व्याख्यान हुआ। कार्यक्रम का संचालन कर रहे अतिथि व्याख्याता सौरभ सराफ ने उनका परिचय बताते हुए कहा कि डॉ. मौना कौशिक बुल्गारिया में रहकर हिंदी भाषा की समृद्धि के लिए अनेक प्रयास कर रही हैं और उन्होंने बुल्गारिया के साहित्य का हिंदी अनुवाद एवं हिंदी रचनाओं का बुल्गारियन भाषा में अनुवाद का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनके द्वारा किया गया हनुमान चालीसा का बुल्गारियन भाषा में अनुवाद अत्यंत प्रसिद्ध है। तत्पश्चात डॉ. मौना कौशिक का व्याख्यान आरम्भ हुआ उन्होंने अपने उद्बोधन में निराला द्वारा रचित कालजयी कृति राम की शक्ति पूजा के विभिन्न पंक्तियों के माध्यम से उनके साहित्य की विशिष्टताओं को उल्लेखित किया।

 

उन्होंने निराला जी को हिंदी साहित्य जगत का ऐसा विरला व्यक्तित्व कहा जो न सिर्फ अपने स्वभाव से निराले है बल्कि उनकी रचनाओं में भी विशेष प्रकार का तेज है। डॉ. मौना कौशिक के वक्तव्य पश्चात जर्मनी से उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय वक्ता कैटरीन क्रेमर जी का उद्बोधन हुआ। उन्होंने निराला की तोड़ती पत्थर कविता की पंक्तियों के माध्यम से उनके काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डाला। क्रेमर जी ने हिंदी भाषा और भारतीय सभ्यता संस्कृति से अपने विशेष लगाव को बताते हुए कहा कि वे पिछले 15 वर्षों से होली दीवाली जैसे त्योहारों के अवसर पर भारत आती हैं उन्हें की यहां की भाषा संस्कृति से विशेष लगाव है। उन्होंने जर्मनी के विद्यार्थियों को अपने द्वारा हिंदी सिखाये जाने की भी बातें भी बतायी। दोनों वक्ताओं के उद्बोधन पश्चात डॉ. बेठियार सिंह साहू द्वारा व्याख्यान विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। जिसमें उन्होंने पूरे कार्यक्रम के सभी वक्ताओं के उद्बोधन का विश्लेषण किया। उन्होंने इस असवर पर निराला के काव्य व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने आधुनिक हिंदी साहित्य जगत का विशिष्ट रचनाकार बताया। उन्होंने कहा कि निराला जी ने कविता, कहानी, उपन्यास इत्यादि अनेक विधाओं में लेखनी चलाकर हिंदी की समृद्धि में योगदान दिया है। उन्होंने निराला जी के अपराजेय व्यक्तित्व पर भी सरोज स्मृति और अन्य कविताओं के माध्यम से प्रकाश डाला। इस अवसर ओर स्नातकोत्तर हिंदी साहित्य की अध्यक्ष प्रियंका तिवारी ने आयोजन की महत्ता पर अपनी बात रखी एवं अंत में छात्र शैलेंद्र सिंह द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।

 

कार्यक्रम का संचालन अतिथि व्याख्याता सौरभ सराफ ने किया। ऑफलाइन और ऑनलाइन संयुक्त माध्यम से हो रहे इस अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान में देश विदेश से अनेक प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी सम्मिलित हुए। महाविद्यालय के नियमित प्राचार्य डॉ. अंजनी तिवारी ने सफल आयोजन पर हिन्दी विभाग को अपनी शुभकामनाएँ संप्रेषित की। आज के आयोजन में डॉ. रमेश तम्बोली, डॉ. कुसुम मिश्रा, डॉ. रवींद्र चौबे, डॉ. शारदा घोघरे, प्रो लक्षेश्वरी, डॉ. कपूरचंद गुप्ता, प्रो रीनू मिश्रा, प्रो विनीता पाण्डेय, प्रो प्रताप चौधरी, प्रो अमित धर दुबे, प्रो उत्तरा कुमार सिदार, प्रो लाकेश जांगड़े, प्रो प्रमोद गबेल, प्रो मिनेश पटेल एवं महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक गण के साथ स्नातकोत्तर हिंदी विभाग से प्रेमा, अनिता, ज्योति, पुष्पांजलि, अल्का, आँचल, अहिल्या, मोनिका, प्रीति, जयप्रकाश, नागेंद्र, रमा, पूनम, रंजीता, ओमप्रिया, लता, केतकी, अवंतिका, नरहरि, प्रसन्न, कैलाश एवं विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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