रायगढ़

बदहाल आंगनबाड़ी, अधर में नौनिहालों का भविष्य, मजबूत छत के इंतजार में नौनिहाल

रायगढ़ जिले के 786 आंगनबाड़ी केंद्र भवन विहीन, 436 किराए के मकानों में संचालित

भवन विहीन आंगनबाड़ी केंद्रों में कैसे संवरेगा बचपन?

रायगढ़ टॉप न्यूज 16 मई। जब भवन न हों और इसके साथ अन्य सुविधाओं की भी दरकार हो तो इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों का कितना विकास होगा। इस बात से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जी, हां कुछ ऐसा ही हाल जिले का है। जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल स्थिति बच्चों के भविष्य और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिले के कुल 2709 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 786 केंद्र अब भी भवन विहीन हैं, जबकि 436 केंद्र किराए के मकानों में संचालित हो रहे हैं। वहीं 158 केंद्र जर्जर घोषित कर निष्प्रयोजन की प्रक्रिया में हैं। इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। ऐसे हालात में नौनिहालों को न तो सुरक्षित वातावरण मिल पा रहा है और न ही गुणवत्तापूर्ण पोषण और प्रारंभिक शिक्षा। वहीं प्रशासन कुछ जर्जर भवनों की मरम्मत कर उसे फिर से शुरू किया है।

सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण और मरम्मत का मुद्दा प्रमुखता से उठा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 229 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।

किराए और जर्जर भवनों में गुजर रहा बचपन
जिले के धरमजयगढ़, घरघोड़ा, कापू, खरसिया, लैलूंगा, मुकड़ेगा, पुसौर, रायगढ़ ग्रामीण, रायगढ़ शहरी और तमनार परियोजनाओं में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। कई जगहों पर छोटे और तंग कमरों में बच्चों को बैठाया जा रहा है, जहां खेल-खेल में शिक्षा जैसी गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। टपकती छतों और जर्जर दीवारों के बीच बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडराता रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई केंद्र अस्थायी ढांचों या खुले स्थानों में संचालित हो रहे हैं।

देखा जाए तो जिले में 2709 केंद्र है। 272 केंद्रों को निष्प्रयोजन घोषित किया गया है तथा 158 आंगनबाड़ी केंद्रों को जर्जर घोषित करने प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन नए भवन व अन्य समस्याओं के चलते यह अधर मे हैं। 1924 स्वयं के भवन में है इसमें लैलूंगा और पुसौर क्रमशः सबसे आगे है। जर्जर भवन की बात करे तो दिया तले अंधेरे की तरह रायगढ़ शहर में 132 एवं खरसिया में 65 लैलूंगा में 72 भवन है। वहीं जिन स्थानों में खुद का भवन है या किराए में संचालित हो रहा है वहां की स्थिति भी दयनीय है।

स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं भी प्रभावित
आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, टीकाकरण और प्रारंभिक देखभाल की पहली कड़ी माने जाते हैं। लेकिन पर्याप्त जगह, स्वच्छ रसोई और भंडारण व्यवस्था के अभाव में पोषण आहार की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में कुपोषण मुक्त अभियान के दावे भी सवालों के घेरे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा योजनाओं की घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।



















शिक्षा की नींव पर भी असर
3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी ही पहली पाठशाला होती है। लेकिन जब पढ़ाई का माहौल ही असुविधाजनक हो, तो बच्चों की सीखने की क्षमता और रुचि पर असर पड़ना स्वाभाविक है। जगह की कमी के कारण खेल आधारित शिक्षण गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं।

…तो फिर कैसे दूर होगा कुपोषण
ग्रामीणों के जहन में यह बात दौड़ रही है कि शासन प्रशासन की ओर से आंगनबाडिय़ों में सुविधाएं भरपूर दी जा रही है। मगर, आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां नौनिहालों के विकास के लिए भवन तक नहीं है। ऐसे में कुपोषणमुक्त का दावा भी बेमानी साबित होता है। भवन के साथ-साथ अन्य कई जरूरी सुविधाओं से नौनिहाल वंचित हैं। कुपोषण दूर करने की कवायद विभाग की ओर से की जा रही है लेकिन ऐसी परिस्थितियों में कुपोषण कैसे दूर होगा। यह भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

कार्यकर्ताओं की बढ़ी परेशानी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं भी सीमित संसाधनों के बीच काम करने को मजबूर हैं। किराए के भवनों में सामग्री का रखरखाव, बच्चों की सुरक्षा और मकान मालिकों के दबाव जैसी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं। किसी भी अनहोनी की स्थिति में कार्रवाई का डर भी उन्हें सताता रहता है।

रायगढ़ शहर और ग्रामीण की स्थिति सबसे खराब
रायगढ़ ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में कुल 434 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 246 भवनयुक्त हैं, लेकिन 151 केंद्र किराए के भवनों में चल रहे हैं, जो जिले में सबसे अधिक है। वहीं शहर में 132 केंद्र जर्जर स्थिति में हैं।

पक्के भवन की दरकार
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में मिलने वाली सुविधाएं ही उनके भविष्य की नींव तय करती हैं। ऐसे में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित और स्थायी भवन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी हो गया है। भवन विहीन और जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र यह संकेत दे रहे हैं कि विकास की दौड़ में अब भी सबसे मासूम हाथ पीछे छूट रहे हैं, जो सिर्फ एक मजबूत छत और बेहतर भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे हैं।



IMG-20240424-WA0003
previous arrow
next arrow

raigarh top news

www.raigarhtopnews.com दैनिक हिन्दी न्यूज वेबसाईट है और रायगढ़ जिले का सर्वाधिक लोकप्रिय व सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला न्यूज वेबसाईट है। www.raigarhtopnews.com पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश व रायगढ़ जिले की शासकीय व अर्द्धशासकीय योजनाओं के साथ सभी खबरों को प्राथमिकता के साथ प्रसारित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है।
Back to top button