रायगढ़

Raigarh News: प्रत्येक जिले में एक ग्राम को हरी खाद के उपयोग हेतु मॉडल ग्राम बनाया जाए- कृषि उत्पादन आयुक्त

रबी 2025-26 की समीक्षा एवं खरीफ 2026 की कार्ययोजना निर्धारण हेतु संभाग स्तरीय बैठक आयोजित
जैविक खेती, हरी खाद एवं नील-हरित काई के उपयोग पर विशेष जोर
फसल विविधीकरण से आय वृद्धि-धान के बदले दलहन-तिलहन को बढ़ावा
उर्वरक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और प्रभावी प्रबंधन पर बल
पीएम किसान, फार्मर आईडी एवं ई-उर्वरक मॉड्यूल की प्रगति की समीक्षा
उद्यानिकी, ऑयल पाम एवं निर्यात योग्य सुगंधित एवं फोर्टिफाइड धान के क्षेत्र विस्तार पर चर्चा
“विकसित कृषि संकल्प अभियान” 5 से 20 मई तक-गांव-गांव होंगे शिविर

रायगढ़, 4 मई 2026/ आगामी खरीफ सीजन को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और किसानों के लिए लाभकारी बनाने के उद्देश्य से जिला कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सृजन सभाकक्ष में कृषि उत्पादन आयुक्त छत्तीसगढ़ शासन श्रीमती शहला निगार की अध्यक्षता में रबी वर्ष 2025-26 की समीक्षा एवं खरीफ 2026 की कार्ययोजना निर्धारण हेतु संभाग स्तरीय मैराथन बैठक आयोजित की गई। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चली इस मैराथन बैठक में कृषि क्षेत्र में नवाचार, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए व्यापक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही संभाग के 8 जिले क्रमशः बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चाम्पा, सक्ती, गौरेला पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कृषि विभाग, उद्यानिकी, मार्कफेड विभागों के एक-एक योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति, उत्कृष्ट प्रदर्शन, कम परफार्मेन्स सहित आगामी खरीफ वर्ष में किसानों की समृद्धि एवं खुशहली के लिए उचित समय से पूर्व पर्याप्त खाद-बीज भण्डारण, परिवहन एवं वितरण, जैविक खेती एवं जैविक खाद को बढ़ावा देने, उद्यानिकी फसल, दलहन-तिलहन खेती-बाड़ी से किसानों को जोड़ने एवं प्रोत्साति करने जैसे विभिन्न बिन्दुओं पर गहन चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक ग्राम को हरी खाद के उपयोग के लिए मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जाए, जिससे किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती के लाभों का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके। उन्होंने फसल विविधीकरण, इंटरक्रॉपिंग एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्राथमिकता देने, धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का एवं मोटे अनाज जैसी फसलों के विस्तार हेतु विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप एक प्रमुख फसल को विकसित कर उत्पादन एवं विपणन को सुदृढ़ बनाने की बात कही।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने जैविक खाद, हरी खाद एवं नील-हरित काई जैसे प्राकृतिक विकल्पों को अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी सहित वैकल्पिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक करने तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरक उपयोग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में किसानों को समय पर खाद एवं बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरक वितरण प्रणाली को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए ई-उर्वरक वितरण प्रणाली मॉड्यूल के प्रभावी क्रियान्वयन, पीओएस मशीन के माध्यम से वितरण एवं भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। इसके साथ ही उड़नदस्ता दल गठित कर उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी पर कड़ी निगरानी रखने एवं उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत लाभार्थियों की फार्मर आईडी निर्माण, पंजीयन एवं सत्यापन की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के निर्देश दिए गए। साथ ही उद्यानिकी फसलों, ऑयल पाम, नर्सरी उत्पादन तथा निर्यात योग्य, सुगंधित एवं फोर्टिफाइड धान के क्षेत्र विस्तार पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई। राष्ट्रीय बागवानी मिशन, नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, सबमिशन ऑन एग्रो फॉरेस्ट्री तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) के तहत दलहन एवं तिलहन फसलों के उपार्जन को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में बताया गया कि “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के अंतर्गत 5 मई से 20 मई 2026 तक प्रत्येक विकासखंड में टीम गठित कर गांव-गांव शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान के माध्यम से किसानों को फसल विविधीकरण, इंटरक्रॉपिंग, उन्नत कृषि तकनीक, किसान क्रेडिट कार्ड, ड्रोन के माध्यम से तरल उर्वरक छिड़काव एवं विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान की जाएगी। बैठक में सभी कलेक्टरों ने किसानों के लिए कृषि को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से जिलों में किए जा रहे कार्यों, नवाचार, खाद-बीज भंडारण, वितरण, लक्ष्य एवं उपलब्धियों की जानकारी प्रस्तुत की तथा आगामी खरीफ सीजन के लिए विस्तृत कार्ययोजना साझा की। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने शासन की योजनाओं एवं कार्यक्रमों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले जिलों की सराहना की तथा अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले जिलों को विशेष प्रयास कर प्रदर्शन सुधारने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर बिलासपुर संभाग के आयुक्त श्री सुनील कुमार जैन, प्रबंध संचालक मार्कफेड जितेंद्र कुमार शुक्ला, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी संचालक श्री लोकेश कुमार चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री अजय कुमार अग्रवाल, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के उप सचिव विकास मिश्रा, संचालक अनुसंधान सेवाएं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय डॉ.विवेक कुमार त्रिपाठी, संचालक अनुसंधान सेवाएं महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्व विद्यालय दुर्ग डॉ.जितेन्द्र सिंह एवं नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डी.के. गवली, जांजगीर-चाम्पा कलेक्टर जनमेजय महोबे, कलेक्टर बिलासपुर श्री संजय अग्रवाल, कलेक्टर मुंगेली श्री कुंदन कुमार, कलेक्टर सक्ती श्री अमृत विकास टोपनो, कलेक्टर गौरला-पेंड्रा-मरवाही श्रीमती लीना कमलेश मंडावी, कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ संजय कन्नौजे, कलेक्टर कोरबा श्री कुनाल दुदावत सहित सभी जिलों के जिला पंचायत सीईओ एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी द्वारा रायगढ़ जिले की विशिष्ट पहचान जवाफूल केलो चावल कृषि उत्पादन आयुक्त को भेंट किया गया।











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