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दिल्ली पर ‘ब्लैक नाइट ऑपरेशन’! तुर्की-चाइना मेड हथियारों से बड़ा खून-खराबा करने चला था पाकिस्तान, 4 गद्दारों की गिरफ्तारी ने खोली रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश

लाल किले के पास कार बम धमाके के सदमे से दिल्ली अभी उबरी भी नहीं थी कि पाकिस्तान की एक और खूनी साजिश राजधानी को लहूलुहान करने से पहले ही पकड़ ली गई। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ऐसे हथियार बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर स्पेशल फोर्सेज और अंतरराष्ट्रीय मिशनों में होता है।
साजिश इतनी खतरनाक थी कि इसे अगर अंजाम दे दिया जाता, तो राजधानी में कई टारगेटेड शूटआउटसीरियल किलिंग, और हिंसक हमले देखने को मिल सकते थे।

पुलिस ने इस मॉड्यूल के 4 भारतीय गद्दारों—मनदीप, दलविंदर, रोहन और अजय उर्फ मोनू—को गिरफ्तार कर लिया है, जो पाकिस्तान की ISI को ग्राउंड सपोर्ट दे रहे थे।

ड्रोन से आई मौत की खेप: ऐसा हथियार जो भारत में मिलना लगभग असंभव

डीसीपी संजीव कुमार यादव की टीम ने जब इस गैंग को पकड़ा, तो उनके पास से बरामद हुए:

  • 10 विदेशी सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल

  • 92 जिंदा कारतूस

  • जिनमें सबसे खतरनाक था तुर्की-मेड PX-5.7, जिसे दुनिया में केवल स्पेशल ऑपरेशन यूनिट्स ही इस्तेमाल करती हैं।



















  • साथ ही चाइना-मेड PX-3, जिसे साइलेंट और तेजी से किए जाने वाले किलिंग ऑपरेशंस में उपयोग किया जाता है।

ये हथियार भारत में किसी भी क्राइम गैंग या लूट-पाट के लिए नहीं, बल्कि बड़े आतंकी ऑपरेशन के लिए भेजे गए थे।

लाल किला धमाके से जुड़ता कनेक्शन?

10 नवंबर को लाल किले के पास Hyundai i20 कार में हुए ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत और कई घायल हुए। पुलिस को शक है कि:

  • पहले धमाके से दहशत फैलाना

  • फिर टारगेटेड शूटिंग और बड़ी हिंसक वारदातों से शहर को झकझोरना

यह दोनों एक ही मेगा आतंकी प्लान के दो हिस्से थे।

इससे कुछ घंटे पहले ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 2,900 किलो विस्फोटक कब्जे में लिए थे—वही विस्फोटक दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ। अब हथियारों की बरामदगी ने इस कहानी को और गहरा बना दिया है।

किसे मिलने वाले थे ये हथियार?

सूत्रों का कहना है कि ये खेप दिल्ली और उत्तर भारत में सक्रिय:

  • बड़े क्राइम सिंडिकेट्स

  • कट्टरपंथी मॉड्यूल

  • और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क

को दी जानी थी। पुलिस आरोपियों के मोबाइल, लेनदेन और विदेशी संपर्क खंगाल रही है।

एजेंसियों को शक है कि ड्रोन के जरिए कई और खेप पहले ही भारत में दाखिल हो चुकी हैं जो अलग-अलग राज्यों में पहुंच चुकी हैं।

क्या खतरा टल गया? शायद नहीं…

चार गद्दारों की गिरफ्तारी और हथियार बरामद होने के बाद भी इस कहानी का सबसे डरावना हिस्सा बाकी है—
इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड कौन है?
और अगला हमला कहां होने वाला था?

सुरक्षा एजेंसियां अब देशभर में इस नेटवर्क की तलाश में हैं। क्योंकि इस युद्ध में जरा-सी चूक… और कीमत होगी जनता की जान



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