छत्तीसगढ़

50 साल पुराने रामगढ़ महोत्सव का भव्य आगाज, अब दुनिया देखेगी सरगुजा की वो धरोहर जिसे लेकर सरकार ने बनाया बड़ा प्लान

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया शुभारंभ, सीताबेंगरा-जोगीमारा गुफाओं समेत ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर, समापन में शामिल होंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 

रायपुर। आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ सोमवार को हुआ। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ महोत्सव का उद्घाटन किया। लोक संस्कृति, साहित्य, पुरातत्व और पर्यटन के संगम बने इस आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भव्य रामलीला ने पहले ही दिन दर्शकों का मन मोह लिया।

उद्घाटन समारोह में स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जबकि नई दिल्ली से आए कलाकारों की रामलीला ने दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। कार्यक्रम में सांसद चिंतामणि महाराज, लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, इतिहासकार, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ महोत्सव सरगुजा की लोक संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व, साहित्य और पर्यटन का अनूठा संगम है, जो नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

मंत्री ने रामगढ़ महोत्सव के 50 वर्ष पूरे होने पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रामगढ़ केवल सरगुजा की नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान आगंतुकों को विश्व की प्राचीनतम रंगशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा, ऐतिहासिक जोगीमारा गुफा, रामगढ़ पर्वत श्रृंखला और अन्य महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इतिहास और पुरातत्व विशेषज्ञ इन स्थलों के महत्व की जानकारी भी देंगे, ताकि युवा पीढ़ी अपनी विरासत को बेहतर ढंग से समझ सके।



















मंत्री ने कहा कि यह महोत्सव क्षेत्रीय पर्यटन को नई दिशा देने के साथ-साथ सरगुजा की ऐतिहासिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि रामगढ़ भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने वनवास काल के दौरान यहां समय बिताया था और महाकवि कालिदास ने भी यहीं मेघदूतम् की रचना की थी। उन्होंने कहा कि सीताबेंगरा, जोगीमारा, राम-जानकी मंदिर और हाथीपोल जैसे स्थल विश्व पर्यटन के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं।

लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि रामगढ़ धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और साहित्यिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। इसकी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटन की अपार संभावनाओं से भरपूर है, जिसे वैश्विक स्तर पर प्रचारित और संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है।

कलेक्टर अजीत वसंत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि रामगढ़ महोत्सव सरगुजा की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने बताया कि आयोजन में स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक लोक संस्कृति को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे क्षेत्रीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में रामगढ़ की ऐतिहासिक पहचान और अधिक मजबूत होगी तथा देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचेंगे।



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