Raigarh News: भीषण गर्मी में हिंसक हुए आवारा कुत्तेः 4 महीने में 1276 से ज्यादा लोगों पर किया हमला

झुंड बनाकर रात में दौड़ने से दहशत में लोग, बाइक से गिरकर हो रहे घायल, 2025 में 2396 और 2024 में 2408 लोग हुए थे डॉग बाइट के शिकार
निगम ने लाखों रुपये खर्च कर चलाया था नसबंदी अभियान, जमीनी स्तर में बेअसर
रायगढ़। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर से लेकर गांव तक डॉग बाइट की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 तक सिर्फ किरोडीमल शासकीय जिला अस्पताल में ही 1276 लोगों के कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए हैं। अगर बात करें मेडिकल कॉलेज, समेत सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की यह आंकड़ा और चौकाने वाला होगा।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बढ़ते तापमान के कारण कुत्ते अधिक आक्रामक और चिड़चिड़े हो रहे हैं। रात के समय शहर की मुख्य सड़कें, कॉलोनियां और गली-मोहल्ले बाइक + सवारों के लिए खतरा बन गए हैं। झुंड में घूम रहे कुत्ते अचानक बाइक के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे कई लोग गिरकर घायल हो रहे हैं। देर रात ड्यूटी से लौटने वाले कर्मचारी, छात्र और डिलीवरी बॉय सबसे अधिक परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब रात में अकेले निकलने में डर लगने लगा है। साल-दर-साल पालतू कुत्तों से ज्यादा गली में घूमने वाले कुत्तों को अधिक खूंखार बना रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में ये चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट बताती है कि 2026 के शुरुआती चार महीनों में सिर्फ किरोड़ीमल सरकारी जिला अस्पताल में 1276 से ज्यादा कुत्तों के हमलों की घटनाएं हुई जबकि 2025 में जनवरी से अप्रैल के बीच यह आंकड़ा 956 पर सिमट चुका था। हैरानी की बात यह है कि 2026 में शुरू के चार महीनों में कुत्तों ने 2025 के मुकाबले कई गुना ज्यादा है।
नगर निगम की नसबंदी मुहिम पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी और पकड़ने की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है। नगर निगम ने इसी वर्ष लाखों रुपये खर्च कर नसबंदी अभियान चलाया था और कई कुत्तों का बधियाकरण भी कराया गया, लेकिन शहर के विभिन्न इलाकों में आज भी आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि अभियान का जमीनी स्तर पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है।
गर्मी बढ़ते ही बढ़े डॉग बाइट के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार भीषण गर्मी, प्यास, भूख और हीट स्ट्रोक के कारण आवारा कुत्ते तनाव में रहते हैं और खुद को सुरक्षित महसूस करने के लिए लोगों पर हमला कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि कुत्ते के काटने या हल्की खरोंच को भी नजरअंदाज न करें। घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से धोना चाहिए तथा एंटी रेबीज वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए। बच्चों को अकेले आवारा कुत्तों के पास न जाने देने और जानवरों को छेड़ने से बचने की भी सलाह दी गई है।
बच्चों और राहगीरों में भय का माहौल
मोहल्लों और बाजारों में झुंड बनाकर घूम रहे कुत्तों से लोगों में दहशत का माहौल है। कई अभिभावक बच्चों को अकेले कहीं भी भेजने से डर रहे हैं। जरा सी चूक होने पर कुत्ते हमला कर देते हैं। कई क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड अचानक वाहनों के सामने आ जाते हैं और वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है।

प्रशासन से विशेष अभियान चलाने की मांग
नागरिकों ने नगर निगम और प्रशासन से आवारा कुत्तों की नसबंदी, वैक्सीनेशन और नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है। साथ ही रात में संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क किनारे फैले कचरे की नियमित सफाई कराने की भी मांग उठ रही है, ताकि कुत्तों के जमावड़े को रोका जा सके।
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