अबीर के जन्मदिन पर विशेष… जिन्दगी तो अपने दम पर जी जाती है

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लोगों के लिए ‘अबीर’ के अनेक अर्थ हो सकते हैं पर मेरे लिए अबीर का एक अर्थ था अबीर याने मेरा पोता।कभी कभी तो लगता है वो एक दिव्यात्मा रहा होगा। अबीर जैसी संताने हर कालखंडों में मौजूद होती हैं जो न कभी जन्म लेती हैं न कहीं जाती हैं। भाग्यशाली होते हैं वे लोग जिनके साथ वे कुछ समय गुजारने आते हैं। अपनी संताने हर किसी को प्रिय होती है पर वह बचपन से ही कुछ अलग किस्म का रहा। पिस्टल, माउसर, हॉवित्जर, गन, बुलेट, राइफल, मोर्टार, शेल, टैंक एक 6 साल के बच्चे के मुंह से सुनना कुछ लोगों को अजीब सा लग सकता है पर हमारे लिए यह सामान्य सी बात थी। आपरेशन का अर्थ उसके लिए मिलिट्री ऑपरेशन ही था। चिकित्सा क्षेत्र में भी ऑपरेशन एक बहुप्रचलित शब्द है से पूरी तरह अनजान। मैंने जब उसे बताया कि तुझे तेरी माँ ने ऑपरेशन के बाद पाया है तो उसने कहा कि वह ऑपरेशन हजरत गंज में हुआ था क्या? शायद उसकी माँ ने उससे कहा था तुझे हमने हजरतगंज से लाया है। आम बच्चों की तरह उसे भी क्रिकेट, फुटबॉल प्रिय थे पर उसका सर्वाधिक प्रिय खेल रहा ऑपरेशन आलआउट। एक वाकी टाकी खुद, दूसरी अपनी हमउम्र ताशी को थमा और हमें पाकिस्तानी बनाकर रोज़ एक ऑपरेशन किया करता था। शिलांग मे घर के सामने मौजूद हरे-भरे बगीचे मे या पीछे मौजद जंगल में। अबीर के हर ऑपरेशन के अंत मे हमे मरना जरूरी था क्योंकि हार शब्द से उसे पैदाइशी नफरत थी।
नियति भी कितना क्रूर खेलती है जाने की उम्र हमारी थी ना मालूम कैसे जाते? पर वह चला गया ठीक वैसे ही जैसे वह अपने खेल में ऑपरेशन करता। आखिरी सांस तक उग्रवादियों से जूझता।

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