रायगढ़

Raigarh: धरमजयगढ़ में आम और मिश्रित बागवानी बनी ग्रामीण समृद्धि की नई पहचान, मनरेगा और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से 24 पंचायतों में हरियाली के साथ बढ़ी किसानों की आमदनी

लैलूंगा का जवाफूल चावल और धरमजयगढ़ की फल बागवानी बन रहे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार
रायगढ़, 25 जून 2026/ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में रायगढ़ जिले में नवाचार आधारित प्रयास सफल परिणाम देने लगे हैं। जिले के सुदूर वनांचल विकासखंड लैलूंगा में जहां जवाफूल चावल किसानों की आय का नया स्रोत बन रहा है, वहीं विकासखंड धरमजयगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत विकसित आम एवं मिश्रित फल बागवानी किसानों की आर्थिक उन्नति का मजबूत आधार बनकर उभरी है।

धरमजयगढ़ की 24 ग्राम पंचायतों में लगभग 164.47 लाख रुपये की लागत से संचालित 140 आम एवं मिश्रित फल बागवानी कार्य आज ग्रामीण आजीविका संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बन गए हैं। जिला प्रशासन रायगढ़, जनपद पंचायत धरमजयगढ़, मनरेगा अमले तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के समन्वित प्रयासों से यह पहल ग्रामीणों के लिए दीर्घकालिक आय का माध्यम बन रही है। क्षेत्र में कृषि एवं मजदूरी पर निर्भर परिवारों के सामने स्थायी आय के सीमित अवसर, भूजल स्तर में गिरावट तथा हरित आवरण में कमी जैसी चुनौतियां थीं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फल बागवानी को रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी साधन के रूप में विकसित किया गया।

इस अभियान की विशेषता केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रही, बल्कि पौधों के संरक्षण और वैज्ञानिक बागवानी प्रबंधन पर भी विशेष बल दिया गया। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा हितग्राहियों को नियमित प्रशिक्षण, जैविक खाद के उपयोग, पौध संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन तथा आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी दी गई। फील्ड विजिट और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से किसानों को उत्पादन बढ़ाने के व्यावहारिक उपाय भी सिखाए गए।

जिला प्रशासन द्वारा सतत मॉनिटरिंग, जनपद पंचायत धरमजयगढ़ द्वारा प्रभावी समन्वय तथा ग्राम पंचायतों एवं मनरेगा अमले की सक्रिय भागीदारी ने इस पहल को सफलता दिलाई। परिणामस्वरूप 8,197 पौधारोपण लक्ष्य के विरुद्ध 7,787 पौधों का रोपण किया गया, जो लगभग 95 प्रतिशत उपलब्धि है। इससे 24 ग्राम पंचायतों में हरित आवरण बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। फल बागवानी से जुड़े किसानों को अब प्रत्यक्ष लाभ मिलने लगा है। आम बागवानी से जुड़े 29 हितग्राहियों को पहले ही वर्ष लगभग 10 हजार रुपये प्रति हितग्राही तक अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है। आगामी वर्षों में फल उत्पादन बढ़ने के साथ यह आय बढ़ने की संभावना है।

ग्रामीणों का कहना है कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग ने उन्हें वैज्ञानिक तरीके से बागवानी करने की समझ दी है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। धरमजयगढ़ का यह मॉडल दर्शाता है कि जिला प्रशासन, मनरेगा और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के समन्वित प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास के लक्ष्य प्रभावी रूप से हासिल किए जा सकते हैं। लैलूंगा के जवाफूल चावल और धरमजयगढ़ की फल बागवानी आज रायगढ़ जिले में ग्रामीण समृद्धि की नई कहानी लिख रहे हैं।





















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