सीजीपीएससी घोटाला: सोनवानी के करीबी उत्कर्ष चंद्राकर से ED ने जब्त किए आठ लाख नकद

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। बुधवार को ईडी की अलग-अलग टीमों ने प्रदेश की राजधानी रायपुर और भिलाई सहित कुल नौ ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। दिनभर चली इस सघन पड़ताल और तलाशी अभियान के बाद ईडी की टीमों ने पीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के करीबी उत्कर्ष चंद्राकर के ठिकाने से आठ लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज भी सीज किए गए हैं, जिसके बाद देर रात ईडी की टीमें वापस लौटीं।
पूर्व अधिकारियों के आवासों पर एक साथ दबिश
ईडी की टीमों ने इस घोटाले से जुड़े कई रसूखदारों और पूर्व अधिकारियों के शासकीय व निजी आवासों पर एक साथ घेराबंदी की थी। इस बड़ी जांच के दायरे में आए प्रमुख नामों में पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव, पूर्व आईएएस अमृत खलखो, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और सहायक नियंत्रक गनवीर शामिल थे। सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई रात करीब 9:30 बजे जाकर थमी। ईडी सूत्रों के मुताबिक, बीते कुछ महीनों में तैयार किए गए पुख्ता इनपुट्स और आधार के कारण इस छापे में केंद्रीय एजेंसी को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी और इसे बेहद सफल माना जा रहा है।
ईडी ने यह साफ कर दिया है कि सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2019 से लेकर 2022 तक आयोजित की गई सभी भर्ती परीक्षाएं अब मनी लाड्रिंग और भ्रष्टाचार की सघन जांच के दायरे में आ चुकी हैं। छापेमारी के दौरान केंद्रीय एजेंसी को परीक्षाओं में की गई भारी अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद से जुड़े कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज हाथ लगे हैं। ईडी अब इन जब्त डिजिटल सबूतों की फोरेंसिक जांच कराएगी। माना जा रहा है कि इस तकनीकी जांच के बाद आने वाले दिनों में घोटाले से जुड़े कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं और केंद्रीय एजेंसी द्वारा बड़ी गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
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