छत्तीसगढ़

सरगुजा ओलंपिक पर सियासी संग्राम! CM साय का पलटवार—“जिन्होंने 5 साल लूटा, वो हमें नसीहत न दें…”

खेल के बहाने छिड़ी जुबानी जंग, घोटाले के आरोपों ने बढ़ाई गर्मी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर खेल आयोजन को लेकर सियासत गरमा गई है। बस्तर के बाद अब सरगुजा ओलंपिक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में माहौल इतना गरम हो गया है कि खेल से ज्यादा चर्चा अब राजनीतिक बयानबाज़ी की हो रही है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आयोजन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले यह गारंटी दे कि बस्तर की तरह सरगुजा ओलंपिक में कोई घोटाला नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मार्च-अप्रैल की भीषण गर्मी में आयोजन कर युवाओं के साथ अन्याय किया जा रहा है, जबकि ऐसे खेल सर्दियों में होने चाहिए।

 CM साय का तीखा जवाब—“लूट करने वाले हमें न सिखाएं”

विपक्ष के इन आरोपों पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा—
👉 “जिन लोगों ने पांच साल तक छत्तीसगढ़ को लूटा, वो हमें नसीहत दें, यह बिल्कुल भी शोभा नहीं देता।”

सीएम साय ने साफ किया कि सरगुजा ओलंपिक का उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देना है और यह एक बड़े स्तर का आयोजन है, जिसमें संभाग भर से खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।

 तीन दिन का आयोजन, साथ में बड़े कार्यक्रम भी

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सरगुजा ओलंपिक का आयोजन तीन दिनों तक संभाग स्तर पर किया जाएगा। इसके अलावा अंबिकापुर में कृषक सम्मेलन और कुदरगढ़ महोत्सव जैसे बड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय लोग शामिल होंगे।

 खेल या राजनीति? उठ रहे बड़े सवाल

अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या सरगुजा ओलंपिक वास्तव में खिलाड़ियों के लिए अवसर है, या फिर यह भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बनता जा रहा है?









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