भारत ‘ए’ टीम में छत्तीसगढ़ का यह बल्लेबाज, अब श्रीलंका में मचाएगा धमाल! रणजी की विस्फोटक पारियों ने बदल दी किस्मत
दिल्ली के खिलाफ 183 रन की यादगार पारी बनी टर्निंग प्वाइंट, 22 वर्षीय आयुष पांडे को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को साबित करने का मौका

रायपुर। छत्तीसगढ़ क्रिकेट के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। घरेलू क्रिकेट में अपने बल्ले से लगातार धमाल मचाने वाले युवा बल्लेबाज आयुष पांडे को भारत ‘ए’ टीम में जगह मिल गई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा श्रीलंका दौरे के लिए घोषित टीम में चयनित होकर आयुष ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। अब उनकी नजरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाने पर टिकी हैं।
भारत ‘ए’ टीम की कमान ध्रुव जुरेल को सौंपी गई है, जबकि देवदत्त पडिक्कल को उपकप्तान बनाया गया है। टीम में साई सुदर्शन, ऋतुराज गायकवाड़, एन. जगदीशन, हर्ष दुबे, यश ठाकुर, अंशुल कंबोज और शैक रशीद जैसे कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी शामिल हैं।
महज 22 साल की उम्र में आयुष पांडे ने घरेलू क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से खास पहचान बनाई है। बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज आयुष ने रणजी ट्रॉफी में लगातार शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। अब तक खेले गए 19 प्रथम श्रेणी मुकाबलों की 34 पारियों में उन्होंने 1430 रन बनाए हैं। उनका औसत 47.66 का रहा है। इस दौरान उन्होंने चार शतक और पांच अर्धशतक जड़े हैं, जबकि उनका सर्वोच्च स्कोर 211 रन रहा है।
आयुष के करियर का सबसे चर्चित प्रदर्शन हाल ही में रणजी ट्रॉफी में दिल्ली के खिलाफ देखने को मिला, जब उन्होंने 183 रन की शानदार पारी खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस पारी में उनके धैर्य, तकनीक और आक्रामक अंदाज का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला था।
सिर्फ लाल गेंद के क्रिकेट में ही नहीं, बल्कि विजय हजारे ट्रॉफी जैसे सीमित ओवरों के टूर्नामेंट में भी आयुष ने अपनी उपयोगिता साबित की है। उन्होंने महत्वपूर्ण मौकों पर 78 और 49 रन की उपयोगी पारियां खेलकर टीम के लिए योगदान दिया।
भारत ‘ए’ टीम में चयन को आयुष पांडे के क्रिकेट करियर का अब तक का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। श्रीलंका दौरे पर उनका प्रदर्शन न केवल उनके भविष्य को नई दिशा दे सकता है, बल्कि भारतीय सीनियर टीम के दरवाजे भी उनके लिए खोल सकता है। अब क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस युवा बल्लेबाज पर टिकी हैं कि वह विदेशी सरजमीं पर अपने बल्ले से कितना बड़ा कमाल दिखा पाते हैं।
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