सरकारी डॉक्टरों पर सबसे बड़ा एक्शन: 4 साल से दफ्तर नहीं आए, बिना बताए गायब रहने वाले 43 डॉक्टर्स बर्खास्त; पिछले महीने भी 51 पर गिरी थी गाज

आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने और लापरवाही को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के लंबे समय से अपनी ड्यूटी से गायब चल रहे 43 सरकारी डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त यानी नौकरी से निकाल दिया गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने बुधवार को इस कड़ी कार्रवाई की जानकारी दी। सरकार के इस सख्त रुख से पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
चार साल से दफ्तर नहीं आ रहे थे कुछ डॉक्टर्स
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई सिविल असिस्टेंट सर्जन के पद पर तैनात डॉक्टरों के खिलाफ की गई है। ये सभी डॉक्टर बिना किसी मंजूरी या नोटिस के लंबे समय से अस्पतालों से नदारद थे। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इनमें से कुछ डॉक्टर तो ऐसे हैं जो पिछले चार साल से एक बार भी अपनी ड्यूटी पर नहीं आए थे। इस घोर लापरवाही को देखते हुए सरकार ने पूरी कानूनी और विभागीय प्रक्रिया का पालन करते हुए इन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
राज्य में लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले मई के महीने में भी सरकार ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक के अधीन आने वाले विभिन्न टीचिंग अस्पतालों (शिक्षण अस्पतालों) के 51 डॉक्टरों को सेवा से हटा दिया था। उन डॉक्टरों पर भी लंबे समय तक काम पर न आने और मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप थे। सरकार लगातार ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है जो सिर्फ कागजों पर तैनात हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए कड़े कदम जरूरी
आंध्र प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर ढंग से चलाने के लिए अनुशासन और नियमों का पालन बेहद जरूरी है। गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य है। स्वास्थ्य मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी बिना बताए गायब रहने वाले कर्मचारियों पर इसी तरह का कड़ा एक्शन लिया जाता रहेगा।
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