छत्तीसगढ़

CG BREAKING: 3200 करोड़ आबकारी घोटाले में बड़ा मोड़! अनिल टुटेजा–अनवर ढेबर को हाईकोर्ट से जमानत

22 महीने बाद मिली राहत, लेकिन DMF केस बना रिहाई में अड़ंगा… सियासत फिर गरमाई

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाला मामले में बड़ा न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर को जमानत दे दी है। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने बुधवार को आदेश सुनाया। इसे मामले में अहम मोड़ माना जा रहा है।

अदालत में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा और शशांक मिश्रा ने पैरवी की। पूर्व में विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर अब आदेश जारी हुआ।

 22 महीने से जेल में थे बंद

अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर समेत अन्य आरोपी करीब 22 महीने से न्यायिक हिरासत में थे। सत्र न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। पहले भी याचिका खारिज हुई और बाद में सुप्रीम कोर्ट से दोबारा आवेदन की स्वतंत्रता मिलने पर नई याचिका दायर की गई थी। उसी पर अब राहत मिली है।

साथ ही यश पुरोहित, नितेश पुरोहित और दीपेंद्र चावला को भी जमानत दी गई है।

 तुरंत रिहाई नहीं, DMF केस बना बाधा

जमानत आदेश के बावजूद अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने दोनों को 550 करोड़ रुपये के कथित DMF घोटाले में भी आरोपी बनाया है। उस मामले में जमानत नहीं मिलने के कारण रिहाई पर रोक बनी रहेगी।

हालांकि नितेश पुरोहित, दीपेंद्र चावला और यश पुरोहित की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।



















 क्या है 3200 करोड़ का आबकारी घोटाला?

यह मामला छत्तीसगढ़ में 2019-2023 के दौरान शराब नीति में बदलाव से जुड़ा है। जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) का दावा है कि नीति में बदलाव कर कुछ विशेष आपूर्तिकर्ताओं को लाभ पहुंचाया गया।

आरोप है कि नकली होलोग्राम और सील के जरिए महंगी शराब सरकारी दुकानों में बेची गई, जिससे कथित रूप से हजारों करोड़ रुपये का खेल हुआ। जांच के अनुसार, राज्य को लगभग 2165 करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान हुआ।

 किन-किन पर हुई कार्रवाई?

मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल समेत कई अधिकारियों और कारोबारियों को आरोपी बनाया गया है।

आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। ED की कार्रवाई के बाद EOW ने भी एफआईआर दर्ज की थी।

 सियासत और कानूनी लड़ाई का नया दौर

आबकारी घोटाला छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे चर्चित मामला रहा है। विपक्ष ने इसे बड़े भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।

अब हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद कानूनी लड़ाई का नया चरण शुरू होगा। हालांकि अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर ही होगा।

फिलहाल इतना तय है— 22 महीने बाद मिली जमानत ने प्रदेश की राजनीति में फिर से हलचल तेज कर दी है।



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