236 करोड़ की साजिश का पर्दाफाश! बैंकों का पैसा बना निजी खजाना… ED की जांच में रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल बेनकाब
IBC की आड़ में खेला गया सबसे बड़ा ‘इनसाइडर गेम’? प्रो-प्रमोटर साजिश से हिला सिस्टम

नई दिल्ली | विमल कौशिक की रिपोर्ट।
जिसे दिवालिया कंपनियों को बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वही सिस्टम को अंदर से खोखला करने का आरोपी बन गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल अरविंद कुमार के खिलाफ 236 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों के साथ बड़ी कार्रवाई की है। यह जांच सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसने 2015 से 2018 के बीच आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की परतें खोल दीं।
ED के मुताबिक, इस खेल में पब्लिक सेक्टर बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाया गया—और सब कुछ IBC/CIRP की आड़ में।
💰कागज़ों में बचाव, हकीकत में लूट
जांच में सामने आया है कि अरविंद कुमार ने रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल रहते हुए अपनी जिम्मेदारी का दुरुपयोग किया। कंपनी के फंड्स को लेयर्ड ट्रांजैक्शनों के जरिए ऐसे लोगों और फर्मों तक पहुंचाया गया, जिनके तार सीधे या परोक्ष रूप से उनसे जुड़े थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि वही पैसा घूम-फिरकर उनके निजी बैंक खातों में पहुंचा।
बैंक रिकॉर्ड्स क्या कहते हैं?
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₹80 लाख से अधिक नकद जमा
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₹1 करोड़ से ज्यादा रकम उन्हीं लोगों से आई, जिन्हें पहले कंपनी से भुगतान किया गया था
यानी—पहले कंपनी से पैसा निकला, फिर रास्ता बदलकर निजी खातों में दाखिल!
🧩ED ने गिनाईं चौंकाने वाली गड़बड़ियां
ED की जांच में कई गंभीर और सुनियोजित अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिनमें शामिल हैं:
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फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए दावों को मानकर अवैध CoC (Committee of Creditors) बनाना
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प्रमोटरों से जुड़े लोगों को सब-कॉन्ट्रैक्ट, सैलरी और ऑपरेशनल खर्च के नाम पर करोड़ों का भुगतान
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निलंबित प्रमोटरों को पर्दे के पीछे से कंपनी चलाने देना
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IBC के तहत जरूरी Avoidance Applications दाखिल न करना—ताकि अवैध लेन-देन पर कार्रवाई न हो
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अयोग्य रिज़ॉल्यूशन प्लान आगे बढ़ाना, जो प्रमोटर परिवार की कंपनियों ने दिए
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कंपनी/संपत्ति बेचने के नाम पर बिना अनुमति करोड़ों की वसूली
हर कदम पर एक ही पैटर्न—प्रो-प्रमोटर साजिश।
🏦बैंकों को 94% का झटका!
ED का दावा है कि इस साजिश के चलते बैंकों को करीब 94% का नुकसान हुआ।
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कुल बैंक दावे: ₹708 करोड़
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लिक्विडेशन के बाद मिले: सिर्फ ₹40 करोड़
यानी जनता के पैसों का लगभग पूरा खेल खत्म।
⛔पहले भी कटघरे में
यह पहला मौका नहीं है। इन्हीं उल्लंघनों के चलते IBBI पहले ही अरविंद कुमार का रजिस्ट्रेशन 2 साल के लिए सस्पेंड कर चुका है। अब ED की कार्रवाई ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है।
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