आवासीय स्कूल में छिपाया गया सच! नाबालिगों की सुसाइड कोशिश दबाने का आरोप, खुलासा होते ही प्राचार्य-वार्डन हटाए गए
एकलव्य आवासीय विद्यालय में बर्बरता का साया, आदिवासी छात्राओं की जान पर बन आई, जांच पर उठे बड़े सवाल

मोहला:
केंद्रीय एकलव्य आवासीय विद्यालय से सामने आई यह खबर शिक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर रही है। नाबालिग छात्रों के साथ बर्बरता और आत्महत्या की कोशिश जैसे बेहद संवेदनशील मामले को दबाने के आरोप के बाद हड़कंप मच गया है। मामला उजागर होते ही प्रशासन ने प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को पद से हटा दिया, जबकि छात्रों की पिटाई के आरोप में एक पीटीआई और दो लेक्चरर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
🚨 जहर पीने की कोशिश को बताया ‘पारिवारिक कलह’
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नाबालिग आदिवासी छात्राओं द्वारा जहर पीने की कोशिश जैसे गंभीर मामले को कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने पारिवारिक कलह बताकर स्थानीय स्तर पर दबाने की कोशिश की। आरोप है कि इस संवेदनशील प्रकरण में न तो समय पर पुलिस कार्रवाई हुई और न ही निष्पक्ष जांच के संकेत मिले।
👧 एक के बाद एक क्यों टूट रहीं मासूम जिंदगियां?
जानकारी के अनुसार, 6 दिनों के भीतर कई नाबालिग छात्राएं आत्महत्या के प्रयास तक पहुंच गईं। सवाल यह है कि—
👉 अगर सब कुछ सामान्य था, तो छात्राएं जान देने पर क्यों आमादा थीं?
👉 क्या स्कूल के भीतर का माहौल ही उन्हें इस हद तक तोड़ रहा था?
🕵️♀️ कलेक्टर के निर्देश पर आधी रात छापा
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर तूलिका प्रजापति के निर्देश पर 12 जनवरी की रात करीब 9 बजे
अपर कलेक्टर जी.आर. मरकाम की अगुवाई में एक टीम ने एकलव्य आवासीय विद्यालय में दबिश दी। टीम में डिप्टी कलेक्टर शुभांगी गुप्ता, एसडीएम हेमेंद्र भूआर्य, तहसीलदार अनुरिमा टोप्पो और आरआई तामेश्वरी इस्दा शामिल थे।
🗣️ छात्रों ने खोला दर्द का पिटारा
जांच के दौरान छात्रों ने सामूहिक रूप से बयान दर्ज कराए। उन्होंने बताया कि—
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लगातार अपमानजनक व्यवहार
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मारपीट और मानसिक प्रताड़ना
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डर और दबाव का माहौल
लंबे समय से झेल रहे थे। इन बयानों के बाद प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी।
⚖️ कार्रवाई हुई, लेकिन सवाल बाकी
प्रारंभिक जांच के आधार पर:
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प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को हटाया गया
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एक पीटीआई और दो लेक्चरर्स को नोटिस
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आत्महत्या की कोशिश करने वाली छात्राओं को घर भेज दिया गया
लेकिन जहरखुरानी के मामले में पुलिस की चुप्पी और विभागीय स्तर पर फाइलें दबाने के आरोप अब भी सवालों के घेरे में हैं।
🧒 बाल संरक्षण आयोग भी मैदान में
शुक्रवार को बाल संरक्षण आयोग की टीम ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए एकलव्य परिसर में प्रवेश किया और जांच शुरू की। इससे उम्मीद जगी है कि अब मामला दबेगा नहीं।
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