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सोमनाथ से गूंजा आस्था का संदेश: पीएम मोदी बोले—‘यह मंदिर पीढ़ियों तक दिव्यता का मार्ग दिखाता रहेगा’

1000 साल की आस्था, शौर्य यात्रा और ड्रोन शो… स्वाभिमान पर्व में इतिहास, विश्वास और शक्ति का महासंगम

सोमनाथ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के पावन सोमनाथ मंदिर को लेकर बड़ा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर हमेशा रहने वाली दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर मार्गदर्शन देता रहेगा। पीएम मोदी इन दिनों ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर हैं।

प्रधानमंत्री शनिवार को सोमनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने 8 से 11 जनवरी तक चल रहे राष्ट्रीय स्मरणोत्सव के विशेष कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह आयोजन 10 जनवरी 2016 को महमूद गजनवी द्वारा किए गए पहले दर्ज हमले के 1000 साल पूरे होने पर आयोजित किया गया है, जो भारत की अटूट आस्था, साहस और पुनर्निर्माण की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

ओंकार नाद और ड्रोन शो ने रचा इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“सोमनाथ हमेशा रहने वाली दिव्यता की निशानी है। इसकी पवित्र उपस्थिति पीढ़ियों तक लोगों को रास्ता दिखाती रहेगी।”
उन्होंने शनिवार के कार्यक्रमों की झलकियां भी साझा कीं, जिनमें ओंकार मंत्र का सामूहिक जाप और अत्याधुनिक ड्रोन शो शामिल रहा, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

शौर्य यात्रा और पूजा-अर्चना

रविवार सुबह करीब 9:45 बजे, प्रधानमंत्री शंख सर्किल से शुरू होने वाली ‘शौर्य यात्रा’ में शामिल होंगे, जो वीरता, बलिदान और राष्ट्र गौरव का प्रतीक मानी जा रही है। इसके बाद 10:15 बजे वे सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।
इसके पश्चात सद्भावना मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।

राजकोट से गांधीनगर तक विकास का संदेश

दोपहर में पीएम मोदी राजकोट जाएंगे, जहां वे मारवाड़ी यूनिवर्सिटी में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के तहत ट्रेड शो और एग्ज़िबिशन का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद कच्छ और सौराष्ट्र के लिए क्षेत्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे।
शाम को वे गांधीनगर पहुंचकर अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज़-2 (सेक्टर 10A से महात्मा मंदिर) का उद्घाटन करेंगे।

75 साल का पुनर्निर्माण, 1000 साल का स्वाभिमान

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की उस सभ्यतागत चेतना को नमन है, जिसने सदियों के आक्रमणों के बावजूद हार नहीं मानी। यह पर्व उन असंख्य भक्तों और वीरों के बलिदान की याद दिलाता है जिन्होंने मंदिर की रक्षा की और हर बार उसे फिर से खड़ा किया।



















गौरतलब है कि इस वर्ष सोमनाथ मंदिर के आधुनिक पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। आज़ादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था, जिसका उद्घाटन 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था।

सोमनाथ एक बार फिर साबित कर रहा है कि
यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, आस्था और अदम्य साहस का जीवंत प्रतीक है।



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