महानदी का रौद्र रूप, पोरथ शिव मंदिर डूबा; कई गांवों में घरों तक पहुंचा पानी
महानदी का रौद्र रूप, पोरथ शिव मंदिर डूबा; कई गांवों में घरों तक पहुंचा पानी
रायगढ़। छत्तीसगढ़ में पिछले दो-तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के बाद महानदी एक बार फिर उफान पर है। बढ़ते जलस्तर का असर रायगढ़ जिले के पुसौर और आसपास के महानदी तटीय इलाकों में दिखाई देने लगा है। नदी किनारे स्थित ऐतिहासिक पोरथ शिव मंदिर जलमग्न हो गया है, जबकि कई गांवों की सड़कों, खेतों और निचले इलाकों में पानी भर गया है। कुछ स्थानों पर पानी घरों तक पहुंचने की स्थिति बनने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में खड़ी धान की फसल के भी प्रभावित होने की आशंका है।
महानदी के बढ़ते जलस्तर के पीछे ऊपरी कैचमेंट में लगातार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। 26 सितंबर को हिराकुंड जलाशय में बढ़ते जलस्तर के बीच अतिरिक्त गेट खोले गए थे और 27 सितंबर की रिपोर्टों में 24 गेट खुले होने की जानकारी सामने आई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
रायगढ़ और सारंगढ़ क्षेत्र के बीच बहने वाली महानदी में जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों में हालात चिंताजनक हो गए हैं। पुसौर क्षेत्र के लिप्ती, पिहरा, नदीगांव, परसरामपुर, सुरसी, सूरजगढ़, रानीडीह, कोर्रा, पोरथ, तोरा, ठेंगागुड़ी, बोरिदा और लुकापारा समेत कई गांवों की सड़कों और खेतों में पानी पहुंचने की जानकारी है। जलस्तर बढ़ने के साथ ग्रामीणों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
बढ़ते जलस्तर का असर पोरथ स्थित प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर पर भी पड़ा है। महानदी के किनारे स्थित यह मंदिर एक बार फिर पानी से घिर गया और मंदिर परिसर जलमग्न हो गया। लगातार बढ़ते पानी के कारण मंदिर तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। पोरथ मंदिर के जलमग्न होने की घटना इससे पहले भी महानदी में बाढ़ की स्थिति के दौरान सामने आती रही है।
पुसौर ब्लॉक के अन्य इलाकों में भी बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर का असर देखने को मिल रहा है। सूरजगढ़, नवापाली, चंघोरी, बाराडोली, तेलीपाली, त्रिभोना और हल्दी सहित आसपास के गांवों में खेतों और सड़कों पर पानी भरने की जानकारी सामने आई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को घरों में पानी पहुंचने की चिंता सता रही है।
महानदी का पानी खेतों में पहुंचने से किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। नदी किनारे स्थित खेतों में खड़ी धान की फसल पानी में डूब गई है। यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो फसल को नुकसान होने की आशंका है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल नुकसान का वास्तविक आकलन जलस्तर कम होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जलस्तर बढ़ने के साथ आसपास के अन्य गांवों में भी पानी पहुंचने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन की टीमें नदी किनारे और निचले इलाकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों को नदी के आसपास जाने और पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों में आवाजाही से बचने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की ओर से जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति के आधार पर आगे की व्यवस्था की जा रही है।
महानदी में बढ़ते पानी का असर चंद्रपुर क्षेत्र में भी सामने आया है। लात नाला पुल के ऊपर पानी आ जाने के कारण रास्ता बंद कर दिया गया है। इससे इस मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ है। लोगों से पानी के तेज बहाव वाले रास्तों से गुजरने से बचने की अपील की गई है।