रायगढ़

Raigarh: अमानवीय हो चुके दौर में मानवीय संवेदना की बात करता है नाटक “असमंजस बाबू की आत्मकथा”

 

युवराज के अभिनय कौशल से मंच पर जीवंत होते दशब्दों को मंच पर दिखे जीवंत होते शब्द : एसएसपी शशिमोहन

“असमंजस बाबू की आत्मकथा” के मंचन को दर्शकों और रंग समीक्षकों ने सराहा

रायगढ़। बीते 9 जून की शाम कला, साहित्य और रंगमंच प्रेमियों के लिये बेहद ख़ास रही, वो इसलिये क्योंकि मुनादी डाट काॅम के सहयोग से इप्टा ने बेहद चर्चित एकल पात्रीय नाटक “असमंजस बाबू की आत्मकथा” के लगातार दो शो का आयोजन पाॅलिटेक्निक ऑडिटोरियम में किया, शाम पांच बजे के शो में संगीतकार मनहरण सिंह ठाकुर, जगमोहन पटेल, अविनाश सरन, साहित्यकार हेमचंद पाण्डेय, सिसोदिया जी, चित्रकार सुशील पटेल, बिजेन्द्र मिश्रा सहित नाट्यप्रेमी दर्शक शामिल हुए, शाम पांच बजे वाले शो में दर्शकों की तादाद भले ही कम थी लेकिन मंचन बेहद प्रभावशाली रहा। मंचन के बाद दर्शकों से काफी सराहना भी मिली। शाम सात बजे वाला शो ख़ास इसलिये बन गया क्योंकि रायगढ़ के डीआईजी एसएसपी शशिमोहन सिंह की गरिमामय मौजूदगी रही। ग़ौरतलब है कि शशिमोहन सिंह ख़ुद रंगमंच और फ़िल्म के एक सिद्धहस्त अभिनेता, निर्देशक और लेखक हैं। उनके अलावा शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के माता-पिता आशा सुभाष त्रिपाठी, चिंतक मनीष रितु सिंह, भोजराम धनमति पटेल, पूनम सोलंकी, समीक्षक मुकेश जैन, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रंगकर्मी अनुपम पाल, साहित्यकार आशा मेहर, शिखा पाल, चित्रकार स्वाति पंड्या, रेणु मिश्रा, कृतिका मिश्रा, मुनादी डाट काॅम के डायरेक्टर विनय पांडेय, कहानीकार पत्रकार हरिशंकर गौरहा सहित अच्छी ख़ासी तादाद में दर्शक सभागार में पहुंचे। थर्ड बेल यानि तीसरी घंटी के बाद “असमंजस बाबू की आत्मकथा” का मंचन शुरू हुआ। बेहतर संवाद अदायगी के साथ नेपथ्य से नाटक के दृश्य और मूड के अनुरूप प्रकाश और ध्वनि के प्रभाव ने नाटक को दर्शकों तक संप्रेषणीय बनापा। नाटक के अंत तक दर्शक पूरी तरह बंधे रहे। नाटक ख़त्म होने के बाद मंच पर डीआईजी एसएसपी शशिमोहन सिंह, कुशल मंच संचालक सेवानिवृत्त उच्चशिक्षाविद् अंबिका वर्मा और वीरमाता  आशा त्रिपाठी को आमंत्रित किया गया। बेहद भावुक होकर अपनी प्रतिक्रिया में आशा त्रिपाठी ने कहा “किसी भी नाटक की प्रस्तुति को देखते हुए अगर आप निःशब्द हो जायें और अपनी भावनाओं को व्यक्त ना कर पा रहे हों तो उस नाट्य प्रस्तुति को श्रेष्ठ कहा जा सकता है और आज इस मंच पर युवराज ने अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति दी है, एक दर्शक के तौर पर ऐसा मेरा मानना है। मैं किसी सभा, समारोह या आयोजन में अब ख़ुद को बहुत कम ही शामिल कर पाती हूं मगर अपने आपको समझाकर युवराज द्वारा अभिनीत इप्टा का नाटक देखने आई, पूरा नाटक देखने के बाद मैं बेहद भावुक हो गई हूं। युवराज, रविंद्र, टिंकू, भरत, श्याम सहित इस नाटक से जुड़े सबको बधाई और आशीर्वाद….।

बेहद सारगर्भित और संतुलित तरीक़े से अभिव्यक्त अपनी प्रतिक्रिया में शशिमोहन सिंह ने कहा कि “साहित्य और रंगमंच के सुधिजन और प्रेक्षागृह में मौजूद प्रबुद्धजन,  हम सब इस नाटक को देखते हुए इसकी प्रस्तुति के साथ एक कलाकार की रंगयात्रा में शामिल हुए और वो रंगयात्रा इतनी गहरी, इतनी विस्तृत थी कि हम सब लोग इस विशाल सागर में रस के तमाम अवयवों को छूते हुए गोते लगा रहे थे, एक कलाकार अपनी कला से शब्दों को कैसे मंच पर जीवंत करता है आज युवराज जी की प्रस्तुति इस सभागार में इस बात की साक्षी है। नाटककार की लेखनी को भी सलाम है क्योंकि हर एक शब्द पर ताली बजाने का मन करता था लेकिन लगता था कि ये ताली कहीं कलाकार की तंद्रा को तोड़ ना दे। कलाकार अपनी प्रस्तुति में इतना खोया हुआ था कि उसका शरीर, उसका मन, उसकी आत्मा नाटक के पात्रों को जीवंत करने में इतनी अभिभूत थी कि हम दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हुए प्रस्तुति के साथ दूसरी दुनिया में ले गई। मैं नाटक के लेखक निर्देशक अभिनेता के साथ साथ नेपथ्य से जुड़े सभी सहयोगियों को बेहतरीन प्रस्तुति के लिए बधाई देता हूं।”

यह एक पात्रीय नाटक सत्यजीत रे की कहानी, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, अमृता प्रीतम की कविताओं, ओशो की टिप्पणियों का कोलाज़ है, जिसे देश के मशहूर नाटककार अख़्तर अली (रायपुर) ने लिखा है, इस नाटक का निर्देशन इप्टा रायगढ़ के आधार स्तंभ अजय आठले (दिवंगत) ने 2004 में रंगकर्मी पत्रकार युवराज सिंह “आज़ाद” को लेकर किया। तब से लेकर अब तक स्थानीय स्तर के अलावा देश और प्रदेश के कई प्रमुख शहरों को मिलाकर कुल 45 मंचन हो चुके थे, 9 जून को रायगढ़ में 47वां और 48वां सफ़ल मंचन किया गया। मंच पर अभिनेता युवराज ने जीवंत अभिनय से दर्शकों और तमाम रंगमंच समीक्षकों से सराहना पाई। नाटक के दौरान नेपथ्य से प्रकाश संचालन श्याम भाऊ देवकर और संगीत संचालन टिंकू देवांगन, मंच प्रबंधन भरत निषाद (सचिव इप्टा रायगढ़) ने किया, प्रस्तुति के दौरान विशेष सहयोग वरिष्ठ रंगकर्मी साहित्यकार रविंद्र चौबे और इमरान ख़ान बिजेन्द्र मिश्रा का रहा। अंत में इप्टा रायगढ़ की तरफ़ से अध्यक्ष विनोद बहिदार ने प्राचार्य पाॅलिटेक्निक,  ऑडिटोरियम प्रभारी रामसिंह, शर्मा टेंट हाऊस,  रवि शर्मा लाईट डिज़ाइनर सहित सभी सहयोगियों, मीडिया संस्थानों और मुनादी डाट काॅम के डायरेक्टर विनय पांडेय का आभार व्यक्त किया साथ ही ये उम्मीद भी जताई कि इप्टा रायगढ़ को भविष्य में भी ऐसा सहयोग मिलता रहेगा।



















युवराज सिंह “आज़ाद”
अभिनेता एवं पत्रकार

1990 से क्षेत्रीय पत्रकारिता और 1995 से भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा रायगढ़ से जुड़कर शौक़िया रंगकर्मी के तौर पर सक्रिय, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली सहित देश के कई नगरों महानगरों में हुए नाट्य मंचनों में बतौर अभिनेता और नेपथ्यकर्मी भागीदारी। फ़िल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, एफ़टीआईआई पुणे के पास आउट अभिनेताओं निर्देशकों के साथ शाॅर्ट फ़िल्म मोर मन के भरम और द फ़र्स्ट फ़िल्म में अभिनय, द फ़र्स्ट फ़िल्म को दो राष्ट्रीय अवार्ड से किया गया सम्मानित, मोर मन के भरम को 2016 के मामी फ़िल्म फ़ेस्टिवल में स्पेशल मेंशन ज्यूरी अवार्ड। रायगढ़ संदेश, बयार, स्पूतनिक, अग्रदूत, केलो प्रवाह, रायगढ़ न्यूज़बुक, एएनआई, न्यूज़ 24, आकाश चैनल, हर्ष न्यूज़ के माध्यम से स्थानीय और क्षेत्रीय पत्रकारिता। संप्रति वेब मीडिया ख़बर बयार का संपादन और तमाम व्यस्तताओं के बीच थोड़ा समय निकालकर रंगमंच को देते हुए अपने ज़िंदा होने का अहसास करा रहे हैं।



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