UP के मदरसों पर CM योगी का बड़ा एक्शन!
विदेशी फंडिंग की परतें खुलेंगी, अब हर खाते और हर ईंट की होगी सख्त जांच

Lucknow News:
उत्तर प्रदेश में मदरसों को लेकर बड़ा प्रशासनिक भूचाल आने वाला है. योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के सभी मदरसों के वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कराने का फैसला किया है. इस जांच का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि मदरसों को मिलने वाला पैसा कहां से आ रहा है, और क्या इसके पीछे विदेशी फंडिंग का कोई संदिग्ध नेटवर्क तो नहीं छिपा है.
सरकारी सूत्रों की मानें तो यह जांच सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी. जरूरत पड़ने पर मदरसा संचालकों के निजी बैंक खातों तक खंगाले जा सकते हैं. साथ ही मदरसों के भवन निर्माण में खर्च हुई रकम और उसके वास्तविक स्रोत की भी परत-दर-परत जांच होगी.
🔍 हर ईंट, हर रुपये पर एजेंसियों की नजर
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटेंगी कि कहीं मदरसों के संचालन या निर्माण में अवैध, अज्ञात या संदिग्ध स्रोतों से पैसा तो नहीं लगाया गया. जिन संस्थानों की आमदनी स्पष्ट नहीं होगी, लेकिन भवन आलीशान और सुविधाएं आधुनिक मिलेंगी—वे सीधे रेड जोन में रखे जाएंगे.
🕵️♂️ ATS स्तर की SIT कर रही जांच
विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों को हल्के में नहीं लिया जा रहा. जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले की जांच एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) स्तर की विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपी गई है.
राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दें.
वहीं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को खुफिया इकाइयों से इनपुट लेकर मदरसों की फंडिंग पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर निदेशालय को भेजने के आदेश दिए गए हैं.
⚠️ करीब 4000 मदरसे जांच के घेरे में
सूत्रों का दावा है कि प्रदेश में लगभग 4000 मदरसों में विदेशी फंडिंग की आशंका जताई जा रही है. कुछ मामलों में यह सामने आया है कि मदरसों के पास आय का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं, फिर भी वे बड़े और आधुनिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं. ऐसे संस्थानों को विशेष निगरानी सूची में डाला गया है.
🗣️ सरकार का सख्त संदेश
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने साफ कहा है कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ATS की जांच में किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरतें.
उन्होंने कहा कि अगर जांच एजेंसियों को किसी भी तरह की सहायता चाहिए, तो सरकार की ओर से हर संभव मदद दी जाएगी.
सरकार का दावा है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करना और संदिग्ध फंडिंग पर पूरी तरह लगाम लगाना है. फिलहाल जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है.
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