छत्तीसगढ़

जंगल में ‘बाप’ बनना था गुनाह! लौटे नक्सलियों का दर्द—अब खुल रहा है खौफनाक राज

नसबंदी की मजबूरी से छिनी थी खुशियां, मुख्यधारा में लौटकर अब मांग रहे नई जिंदगी—रिवर्स ऑपरेशन से बदल रही किस्मत


छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद की काली दुनिया से लौटे लोगों की कहानी अब एक ऐसे दर्दनाक सच को उजागर कर रही है, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जंगलों में बंदूक उठाने वाले इन लोगों के लिए ‘पिता बनना’ भी कभी एक अपराध जैसा था।

दरअसल, माओवादी संगठन में शादी की अनुमति तो थी, लेकिन बच्चों को जन्म देने पर सख्त पाबंदी थी। इसके पीछे वजह यह बताई जाती थी कि परिवार और बच्चों का मोह संगठन के लिए कमजोरी बन सकता है। यही कारण था कि कई पुरुष नक्सलियों की जबरन नसबंदी कर दी जाती थी, ताकि वे कभी पिता न बन सकें।

अब जब ये लोग मुख्यधारा में लौट रहे हैं, तो उनका दर्द सामने आ रहा है। Bastar में पुनर्वास के बाद सरकार की ओर से इन पूर्व नक्सलियों के लिए ‘रिवर्स नसबंदी’ की सुविधा दी जा रही है, जिससे वे सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकें।

बस्तर के आईजी Sundarraj P के अनुसार अब तक 56 पूर्व माओवादियों का रिवर्स नसबंदी ऑपरेशन किया जा चुका है। इनमें से 27 लोग अब संतान सुख प्राप्त कर चुके हैं और अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं। वहीं कई अन्य लोग भी इस प्रक्रिया के लिए आवेदन कर रहे हैं।

पूर्व नक्सलियों का कहना है कि जब वे संगठन में थे, तब दूसरों के बच्चों को देखकर उन्हें अंदर ही अंदर दर्द होता था। उन्हें लगता था कि काश उनके भी बच्चे होते, जो उनके साथ हंसते-खेलते। लेकिन संगठन के नियमों के कारण यह सपना अधूरा ही रह गया।

एक पुनर्वासित नक्सली ने बताया कि सरेंडर के बाद उसने सबसे पहले यही मांग रखी कि उसकी नसबंदी को रिवर्स किया जाए, ताकि वह भी पिता बनने का सुख महसूस कर सके। ऑपरेशन के बाद जब उसे संतान प्राप्त हुई, तो उसे ऐसा लगा जैसे उसे नई जिंदगी मिल गई हो।









नक्सल संगठन से जुड़े एक पूर्व डॉक्टर ने भी खुलासा किया कि संगठन में केवल पुरुषों की नसबंदी की जाती थी, महिलाओं की नहीं। यह प्रक्रिया 2-3 सालों तक चली, जिसमें कई लोगों को इस मजबूरी से गुजरना पड़ा।

यह कहानी सिर्फ एक संगठन के नियमों की नहीं, बल्कि उन जिंदगियों की है, जिन्हें अपने ही सपनों से दूर कर दिया गया था। अब मुख्यधारा में लौटने के बाद ये लोग न सिर्फ नई शुरुआत कर रहे हैं, बल्कि खोई हुई खुशियों को भी फिर से पाने की कोशिश में जुटे हैं।



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