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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध जुआ-सट्टा के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन अंकुश” का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। पुलिस की लगातार सख्त कार्रवाई और दबिश के चलते सट्टा नेटवर्क से जुड़े बड़े खाईवाल खुद सामने आकर सरेंडर कर रहे हैं।
इस अभियान का नेतृत्व कर रहे एसएसपी शशि मोहन सिंह की रणनीति ने जिले में सक्रिय सट्टा सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है। हाल ही में कुख्यात सट्टा खाईवाल हेमराज बरेठ उर्फ पप्पू बरेठ ने एसएसपी के समक्ष आत्मसमर्पण किया। वहीं एक अन्य बड़े सटोरिये मोहम्मद शाहनवाज मलिक उर्फ शानू ने भी कोतवाली थाना पहुंचकर सरेंडर किया, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस जांच में सामने आया था कि सट्टा लिखने वाले आरोपियों से पूछताछ के दौरान इन दोनों खाईवालों के नाम उजागर हुए थे। इसके बाद से पुलिस लगातार दबिश दे रही थी, जिससे घबराकर आरोपी खुद सामने आने लगे।
हेमराज बरेठ का आपराधिक रिकॉर्ड भी लंबा रहा है। उसके खिलाफ वर्ष 2023 से 2025 के बीच अलग-अलग थानों में कई सट्टा संबंधी मामले दर्ज हैं। वहीं वर्ष 2026 में भी उसका नाम नए मामलों में सामने आया था, जिसके बाद वह फरार चल रहा था।
दूसरी ओर, मोहम्मद शाहनवाज मलिक के खिलाफ भी इसी वर्ष कोतवाली थाना में कई प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, वह कमीशन पर सट्टा लिखवाने के नेटवर्क का संचालन करता था।
रायगढ़ पुलिस अब सिर्फ सट्टा लिखने वालों तक सीमित नहीं रहकर पूरे नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंच रही है। यही वजह है कि लगातार कार्रवाई से अवैध सट्टा कारोबार कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जिले में जुआ-सट्टा जैसी अवैध गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की है कि ऐसे अपराधों से दूर रहें और इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सके।





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