पत्रकारिता के पाँच दशक: मूल्य, साहस और जनसेवा की उज्ज्वल परंपरा – रमेश शर्मा

छत्तीसगढ़ December 21, 2025 • रिपोर्टर: raigarh top news
पत्रकारिता के पाँच दशक: मूल्य, साहस और जनसेवा की उज्ज्वल परंपरा – रमेश शर्मा

पत्रकारिता के पाँच दशक: मूल्य, साहस और जनसेवा की उज्ज्वल परंपरा – रमेश शर्मा

 

कलम की साधना के 50 स्वर्णिम वर्ष: रमेश शर्मा का अतुलनीय पत्रकारिता योगदान…

Ramesh Sharma:  पत्रकारिता में पाँच दशक पूरे करना केवल वर्षों की गिनती नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा, निरंतर साधना और जनहित के प्रति अडिग प्रतिबद्धता का प्रमाण है। बदलते समय, बदलती तकनीक और बदलते सत्ता-समीकरणों के बीच अपनी विश्वसनीयता को अक्षुण्ण बनाए रखना किसी तपस्या से कम नहीं। ऐसे ही तपस्वी व्यक्तित्व का नाम है – रमेश शर्मा, जिनकी कलम पाँच दशकों से समाज की नब्ज़ पर हाथ रखे हुए निर्भीकता से सच लिखती रही है।

अनवरत लेखनी, अमिट पहचान

पत्थलगांव से आरंभ हुआ रमेश शर्मा का पत्रकारिता-सफर केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं रहा। यह यात्रा सामाजिक सरोकारों, जनसमस्याओं और विवेकपूर्ण विश्लेषण की सुदीर्घ परंपरा बन गई। राजनीतिक उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक बदलाव – हर दौर को उन्होंने अपनी पैनी दृष्टि और सशक्त भाषा में दर्ज किया। उनकी रिपोर्टिंग में तथ्य, संवेदना और जिम्मेदारी का संतुलन सदैव दिखाई दिया।

उनकी पत्रकारिता और पहचान केवल पत्थलगांव – जशपुर तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी रिपोर्टिंग ने पूरे छत्तीसगढ़ में विशेष पहचान बनाई। जशपुर से लेकर रायगढ़, बिलासपुर और राजधानी रायपुर तक के पत्रकार उनकी लेखनी और अनुभव के कायल रहे हैं। उनकी विश्वसनीय पत्रकारिता के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, वरिष्ठ नेताओं और अनेक ब्यूरोक्रेटस से उनके सम्मानपूर्ण व विशेष संबंध भी रहे।

निष्पक्षता और निर्भीकता: पहचान की नींव

रमेश शर्मा की पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूँजी है – निष्पक्षता और निर्भीकता। सत्ता का दबाव हो या किसी प्रकार का प्रलोभन, उनकी कलम कभी नहीं झुकी। जनहित के प्रश्नों को प्राथमिकता देना, सच को स्पष्ट शब्दों में सामने रखना और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना, यही उनकी कार्यशैली रही है। यही कारण है कि दशकों से उनकी लेखनी पर पाठकों और समाज का अटूट विश्वास बना हुआ है।

बदलते दौर के साथ सार्थक कदमताल

पिछले पचास वर्षों में पत्रकारिता ने प्रिंट से डिजिटल तक लंबी यात्रा तय की है। रमेश शर्मा ने हर परिवर्तन को खुले मन से अपनाया। नई तकनीकें सीखीं, नए माध्यमों को समझा और अपनी पत्रकारिता को समयानुकूल ढाला, बिना मूल्यों से समझौता किए। यह उनकी सीखने की निरंतरता, अनुकूलन क्षमता और आधुनिक दृष्टि का प्रमाण है।

अपने पत्रकारिता सफर के दौरान रमेश शर्मा ने दैनिक भास्कर, IBC24, यूनीवार्ता, अमृत संदेश और देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों एवं न्यूज चैनलों के साथ कार्य करते हुए अपनी सेवाएँ दीं और वहाँ अपने महत्वपूर्ण व प्रभावी योगदान से पत्रकारिता को समृद्ध किया।

जमीनी रिपोर्टिंग: प्रभाव और परिणाम

उनकी पत्रकारिता की आत्मा जमीनी रिपोर्टिंग रही है। वे सतही खबरों से आगे बढ़कर समस्याओं की जड़ तक पहुंचे और उनके सामाजिक व प्रशासनिक प्रभावों का सटीक विश्लेषण किया।

एक समय में धरमजयगढ़ के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल विहीन नालों की गंभीर समस्या को उन्होंने प्रभावी ढंग से उजागर किया। इस विषय में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह को अवगत कराया गया। उन्होंने स्वयं स्थल का निरीक्षण किया और अगले ही दिन मुख्यमंत्री तक जानकारी पहुंचने पर सड़क व पुलों की स्वीकृति मिली। यह उदाहरण बताता है कि जिम्मेदार पत्रकारिता कैसे जनजीवन में ठोस परिवर्तन लाती है।

युवा पत्रकारों के मार्गदर्शक

रमेश शर्मा केवल वरिष्ठ पत्रकार नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने अपने आचरण और लेखन से पत्रकारिता के उच्च नैतिक मानकों को स्थापित किया। अनेक युवा पत्रकारों को उन्होंने प्रोत्साहित किया, सही दिशा दी और सिखाया कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व है।

जनहितकारी पत्रकारिता का उजला अध्याय

आमजन की आवाज बनना, उनके प्रश्नों को मंच देना और व्यवस्था को जवाबदेह बनाना यही उनकी पत्रकारिता का सार रहा है। अनेक अवसरों पर उनकी लेखनी ने जनमत को दिशा दी और नीतिगत निर्णयों को प्रभावित किया। यही किसी पत्रकार की सबसे बड़ी सफलता होती है।

सम्मान और उपलब्धियाँ

अपनी दीर्घ और प्रभावशाली पत्रकारिता यात्रा के दौरान रमेश शर्मा को पत्रकारिता के लिए कई विशेष सम्मान और प्रशस्तियाँ प्राप्त हुई हैं। ये सम्मान उनकी निष्ठा, साहस, सामाजिक प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट लेखन के सार्वजनिक प्रमाण हैं – जो उनकी साधना को और भी गौरव प्रदान करते हैं।

25 मई 1998 को जशपुर जिला गठन समारोह के अवसर पर प्रभारी मंत्री चनेशराम राठिया, रायगढ़ कलेक्टर केशरी साहब, जशपुर कलेक्टर आर.एन. शुक्ला एवं एसपी बी.एस. मरावी के साथ मंच पर उपस्थित रहकर रमेश शर्मा भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

अभिनंदन और मंगलकामनाएँ

पत्रकारिता के पाँच स्वर्णिम दशकों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आपकी अटूट निष्ठा, अदम्य साहस और जनहित के प्रति समर्पण को सादर नमन। आपकी यात्रा न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के लिए प्रेरक विरासत भी है।

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