ज्ञान की अनमोल धरोहर अम्बिकापुर में मिलीं सौ साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां

रायपुर, 13 मई 2026. ‘ज्ञानभारत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ के तहत सरगुजा जिले के बरगंवा ग्राम में एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। यहाँ चौबे परिवार द्वारा पीढ़ियों से सहेजकर रखी गई दुर्लभ पांडुलिपियों का पता चला है, जिनका अब जिला प्रशासन द्वारा डिजिटल संरक्षण किया गया है। यह खोज जिले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अक्षुण्ण रखने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
पूजाघर के बस्ते में मिला पूर्वजों का ज्ञान-खजाना
सर्वेक्षण के दौरान बरगंवा निवासी 72 वर्षीय श्री बाल कृष्ण चौबे के घर दो महत्वपूर्ण पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। श्री चौबे ने अपने पूर्वजों की इस अमानत को दशकों से अपने पूजाघर में कपड़े के बस्ते में सुरक्षित रखा था। बन दुर्गा महामंत्र यह पांडुलिपि श्री चौबे के छोटे दादा स्वर्गीय श्री देवदत्त शर्मा द्वारा 27 अगस्त 1932 को हस्तलिखित रूप में तैयार की गई थी। दुर्गा सप्तशती लगभग वर्ष 1895-96 की यह पांडुलिपि 183 पृष्ठों की है। सौ साल से अधिक पुरानी होने के बावजूद इसके पन्ने आज भी सुरक्षित हैं।
डिजिटल संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षा
कलेक्टर अजीत वसंत और जिला पंचायत सीईओ श्री विनय अग्रवाल के नेतृत्व में इन दस्तावेजों का दस्तावेजीकरण किया गया। डिजिटल संरक्षण के दौरान कलेक्टर स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और प्राचीन ज्ञान परंपरा का जीवंत इतिहास हैं। इन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
प्रमुख बिंदु और उपलब्धियां
पांडुलिपियों की विस्तृत जानकारी और डिजिटल प्रतियों को ज्ञानभारतम पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। विशेषज्ञों ने पांडुलिपियों की उत्कृष्ट स्थिति को देखकर चौबे परिवार की श्रद्धा और संरक्षण प्रयासों की सराहना की। अभियान का लक्ष्य है कि जिले में छिपी ऐसी ऐतिहासिक और प्राचीन धरोहरों को तकनीक के माध्यम से दुनिया के सामने लाना और उन्हें नष्ट होने से बचाना। इस अवसर पर संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल, जनपद सीईओ राजेश सेंगर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।
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