रायगढ़ में 38 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का हुआ मापन, जरूरत के अनुसार मिलेंगे सहायक उपकरण

रायगढ़ October 24, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
रायगढ़ में 38 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का हुआ मापन, जरूरत के अनुसार मिलेंगे सहायक उपकरण

रायगढ़ में 38 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का हुआ मापन, जरूरत के अनुसार मिलेंगे सहायक उपकरण

 

व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और कैलिपर्स सहित उपकरण उपलब्ध कराने की पहल, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में मिलेगी मदद

रायगढ़ 24 अक्टूबर 2026/ शासन की मंशानुरूप एवं कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए समग्र शिक्षा अभियान, जिला रायगढ़ के अंतर्गत रायगढ़ विकासखंड के बीआरसी भवन में मापन शिविर आयोजित किया गया। शिविर में रायपुर से आई विशेषज्ञ टीम ने 38 बच्चों का मापन कर उनकी शारीरिक स्थिति और व्यक्तिगत जरूरतों का आकलन किया। मापन के आधार पर बच्चों को उपयुक्त सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

जिला मिशन समन्वयक आलोक स्वर्णकार ने बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे बच्चों को विद्यालय आने-जाने, पढ़ाई करने और अन्य गतिविधियों में भाग लेने में सहूलियत मिलेगी।

मापन के आधार पर मिलेंगे उपयुक्त उपकरण

आईईडी प्रभारी श्री भूपेंद्र पटेल ने बताया कि विशेषज्ञ टीम ने प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता के अनुसार मापन किया है। इसके आधार पर जरूरतमंद बच्चों को व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, कैलिपर्स सहित अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उपयुक्त उपकरण मिलने से बच्चों की आवाजाही आसान होगी और वे विद्यालयीन गतिविधियों में अधिक सक्रियता से भाग ले सकेंगे।

समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल

समग्र शिक्षा अभियान के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। शिविर में विभिन्न विकासखंडों के बीआरपी और विशेष शिक्षक उपस्थित रहे। मापन प्रक्रिया में समग्र शिक्षा अभियान की एपीसी श्रीमती ज्योत्सना राजपूत, फिजियोथेरेपिस्ट श्रीमती रागिनी राठौर तथा बीआरसी मनोज अग्रवाल ने समन्वय किया। इस पहल से बच्चों को उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे उनकी दैनिक गतिविधियां आसान होंगी, विद्यालय में सहभागिता बढ़ेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

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