रायगढ़ की 268 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने की तैयारी, 27 नवंबर को होगी विशेष ग्राम सभा

रायगढ़ October 24, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
रायगढ़ की 268 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने की तैयारी, 27 नवंबर को होगी विशेष ग्राम सभा

रायगढ़ की 268 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने की तैयारी, 27 नवंबर को होगी विशेष ग्राम सभा

 

जिले में अब तक 282 ग्राम पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित

अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित, 120 अधिकारियों-कर्मचारियों ने बाल विवाह रोकने की शपथ ली

रायगढ़, 24 अक्टूबर 2026/ बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले की ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए आगामी 27 नवंबर को विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत घोषित करने का प्रस्ताव पारित कराने के साथ इस अभियान को जनभागीदारी से आगे बढ़ाया जाएगा। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिला पंचायत के सभाकक्ष में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें अधिकारियों को बाल विवाह रोकने, कानूनी प्रावधानों का पालन कराने और ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिजीत बबन पठारे ने कार्यशाला में अधिकारियों से कहा कि 27 नवंबर को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत का प्रस्ताव अनिवार्य रूप से रखा जाए और नियमानुसार पारित कराया जाए। उन्होंने अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।

282 ग्राम पंचायतें बाल विवाह मुक्त, शेष पर रहेगा फोकस

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वर्ष 2025-26 में रायगढ़ जिले की 282 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है। अब शेष 268 ग्राम पंचायतों को भी इस सामाजिक कुरीति से मुक्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले की कुल 60 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि पहले से बाल विवाह मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों में भी लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि वहां दोबारा बाल विवाह की घटनाएं न हों। कार्यशाला में बाल विकास परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को विभागीय कार्यों की जानकारी देने के साथ ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया गया।

अधिकारियों को बताए बाल विवाह रोकने के कानूनी प्रावधान

जिला बाल संरक्षण अधिकारी धीरेंद्र कुमार शर्मा ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों और कानूनी अधिकारों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव, सेक्टर स्तर पर पर्यवेक्षक, परियोजना स्तर पर परियोजना अधिकारी और जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है। अभियान के तहत पंचायत स्तर पर विवाह पंजी का संधारण किया जाएगा। ग्राम सभा, ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों में बाल विवाह मुक्त घोषित करने संबंधी प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इसके बाद दावा-आपत्ति के प्रकाशन और अनुशंसा सहित प्रस्ताव जिला स्तर पर भेजने की प्रक्रिया पूरी होगी। जिला स्तर पर अंतिम दावा-आपत्ति प्रकाशन के बाद नियमानुसार ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की कार्रवाई की जाएगी।

बाल विवाह की सूचना 1098 पर देने की अपील

जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिलने या इसकी आशंका होने पर तत्काल स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, सरपंच, पंचायत सचिव या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना दें। समय पर मिली सूचना से बाल विवाह रोकने और बच्चों का भविष्य सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। कार्यशाला के अंत में जिला कार्यक्रम अधिकारी ने जिला कार्यालय के कर्मचारियों, सभी परियोजना अधिकारियों, पर्यवेक्षकों, जिला बाल संरक्षण इकाई के कर्मचारियों और चाइल्ड हेल्पलाइन के समन्वयक सहित उपस्थित 120 अधिकारियों-कर्मचारियों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति की रोकथाम के लिए पूरी निष्ठा से काम करने की सामूहिक शपथ दिलाई।

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