रायगढ़ घराने की शास्त्रीय परंपरा से आलोकित ‘विरासत 2026’ का भव्य समापन

दो दिवसीय अखिल भारतीय सांस्कृतिक महोत्सव ने प्रस्तुत की कला, साधना और विरासत की अनुपम छटा
बिलासपुर। भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत की गौरवशाली परंपरा, विशेषकर कथक के रायगढ़ घराने को समर्पित दो दिवसीय अखिल भारतीय सांस्कृतिक महोत्सव “विरासत 2026” का आयोजन 21 एवं 22 फरवरी 2026 को देवकीनंदन दीक्षित सभा भवन, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल प्रांगण, बिलासपुर में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कला विकास केन्द्र, बिलासपुर द्वारा स्वर्गीय पं. फिरतु महाराज (वरिष्ठ नृत्याचार्य, रायगढ़ घराना) की पुण्य स्मृति में आयोजित इस महोत्सव ने परंपरा, साधना और सांस्कृतिक समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। आयोजन को संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं एसईसीएल, बिलासपुर का सहयोग प्राप्त हुआ।
प्रथम दिवस : साधना और सौंदर्य का सजीव संगम
21 फरवरी को आयोजित प्रथम सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ श्री विश्ववेद संगीत महाविद्यालय, बिलासपुर के कलाकारों द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने समूचे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित किया।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिलासपुर के कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल उपस्थित रहे। अध्यक्षता श्री आलोक त्रिपाठी (पूर्वकालिक निदेशक, एन.जी.सी.एल., एनटीपीसी, दिल्ली) ने की। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. अरविंद तिवारी (कुलसचिव, सी.वी. रमन विश्वविद्यालय), श्रीमती अनुपमा शर्मा (जी.जी.यू. प्रोफेसर) सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में युवा कलाकार मास्टर आरव भुरंगी द्वारा प्रस्तुत स्वतंत्र तबला वादन ने श्रोताओं को ताल और लय की सूक्ष्मताओं से परिचित कराया।
संध्या का मुख्य आकर्षण समूह कथक नृत्य ‘ऋतु श्रृंगार’ रहा, जिसमें ऋतुओं के विविध भावों को कथक की शास्त्रीय शैली में साकार किया गया। ज्योति श्री बोहिदार वैष्णव, चिरंजीवी हलधर, सृष्टि गर्ग, ओजस्विता रायल, चित्रांशी पर्णिकार एवं निहारिका यादव ने प्रभावशाली प्रस्तुति दी। संगीत निर्देशन श्रीमती ठाकुर देवदत्त सिंह द्वारा तथा नृत्य निर्देशन पं. सुनील वैष्णव एवं सुश्री वासंती वैष्णव द्वारा किया गया। प्रस्तुति ने रायगढ़ घराने की तकनीकी शुद्धता और भावात्मक गहराई को जीवंत कर दिया।
द्वितीय दिवस : परंपरा का गरिमामय समापन
22 फरवरी की द्वितीय एवं समापन सांस्कृतिक संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री पं. रामलाल बरेठ उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री आलोक श्रीवास्तव (पूर्णकालिक निदेशक, एनजीजीएल) ने की। विशिष्ट अतिथियों में श्रीमती शिल्पा केडिया (अध्यक्ष, साखी फाउंडेशन), मास्टर शरद वैष्णव (संचालक, वैष्णव संगीत महाविद्यालय) सहित अन्य गणमान्यजन मंचासीन रहे।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ गोस्वामी म्यूजिक क्लासेस द्वारा पं. देवेंद्र गोस्वामी के निर्देशन में प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ।
इसके पश्चात वैष्णव संगीत महाविद्यालय द्वारा प्रस्तुत समूह कथक नृत्य ने रायगढ़ घराने की सशक्त पदचाप, लयात्मक सौंदर्य और भावभंगिमाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
संगीत प्रेमियों के लिए सरोद–सितार–तबला जुगलबंदी विशेष आकर्षण रही, जिसमें सितार पर आकाश सोनी, सरोद पर अंशीका सोनी तथा तबले पर मनु कोराल (जबलपुर, मध्यप्रदेश) ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
समापन संध्या का विशेष आकर्षण सुश्री पणिकर द्वारा प्रस्तुत रायगढ़ घराने की एकल कथक प्रस्तुति रही। उनकी सधी हुई नृत्य भाषा, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और तकनीकी परिपक्वता ने दर्शकों को कथक की सूक्ष्मताओं से साक्षात्कार कराया और पूरे महोत्सव को कलात्मक ऊँचाई प्रदान की।
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