CG COURT ALERT: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CBI कोर्ट के आदेश को किया रद्द, 36 साल पुराने लोन मामले में बैंक मैनेजर सहित तीन आरोपी बरी

छत्तीसगढ़ December 13, 2025 • रिपोर्टर: raigarh top news
CG COURT ALERT: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CBI कोर्ट के आदेश को किया रद्द, 36 साल पुराने लोन मामले में बैंक मैनेजर सहित तीन आरोपी बरी

CG COURT ALERT: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CBI कोर्ट के आदेश को किया रद्द, 36 साल पुराने लोन मामले में बैंक मैनेजर सहित तीन आरोपी बरी

बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 36 साल पुराने लोन मामले में CBI कोर्ट के दंड आदेश को निरस्त कर दिया है। इस फैसले से देना बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक इंद्रजीत सोलंकी समेत तीन आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।

मामले का इतिहास

1989 से 1992 के बीच, सोलंकी पर आरोप था कि उन्होंने सुदर्शन जैन और सुधीर क्षीरसागर के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। इसके तहत शिल्पा इंटरप्राइजेज और श्रीवास्तव ट्रेडर्स जैसी फर्मों के नाम पर 1 लाख 50 हजार रुपए का लोन मंजूर कराया गया। CBI ने दावा किया कि ये फर्में अस्तित्व में ही नहीं थीं और इनके दस्तावेज जाली पाए गए।

CBI कोर्ट का निर्णय और हाईकोर्ट की समीक्षा

2007 में CBI कोर्ट ने आरोपियों को साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सजा सुनाई थी। आरोपियों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि:

  • बैंक रिकॉर्ड, स्टॉक बीमा और फर्मों के लेन-देन के प्रमाण यह दर्शाते हैं कि फर्में सक्रिय थीं।

  • कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला कि दस्तावेज जाली थे या आरोपी किसी आपराधिक साजिश में शामिल थे।

  • बैंक ऑडिट और विभागीय जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।

हाईकोर्ट का फैसला

जस्टिस रजनी दुबे ने कहा कि संशय कभी भी सबूत का स्थान नहीं ले सकता। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने तीनों की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया।

संक्षेप में:
इस फैसले से साबित होता है कि ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य के बिना किसी भी आपराधिक साजिश के आरोप में दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं। देना बैंक के मैनेजर और अन्य आरोपियों को अब 36 साल पुराने विवाद से बड़ी राहत मिली है।

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