CG BIG NEWS: डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों ठगने वाले दिल्ली और कर्नाटक के 3 शातिर आरोपी गिरफ्तार, 10.76 करोड़ का ट्रांजेक्शन और 18 म्यूल अकाउंट, देश के अलग-अलग राज्यों में 17 मामले दर्ज, मुंबई-दिल्ली क्राइम ब्रांच का डर दिखाकर ठगी

रायपुर। साइबर अपराधियों के खिलाफ रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा के निर्देशन में चल रहे ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। रायपुर रेंज साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट और देशव्यापी साइबर ठगी करने वाले एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार दिल्ली, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना सहित तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने अकेले रायपुर के दो अलग-अलग मामलों में करीब पौने दो करोड़ रुपये की ठगी की थी। आइए देखते हैं रायपुर पुलिस का यह बड़ा एक्शन।”
“पहली बड़ी कामयाबी थाना विधानसभा क्षेत्र के एक मामले में मिली, जहाँ प्रार्थी सपन कुमार को मुंबई क्राइम ब्रांच का फर्जी अधिकारी बनकर मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर डराया गया और 24 घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखकर 1.25 करोड़ रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए खातों को होल्ड कराया और पीड़ित को ₹60 लाख वापस भी दिलवाए, साथ ही मुख्य आरोपी आर्यन सिंह को दिल्ली से दबोच लिया। वहीं, दूसरे मामले में कोतवाली पुलिस ने हुबली, कर्नाटक से जितेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है, जिसने महिला पुष्पा अग्रवाल को सीबीआई का डर दिखाकर 42 लाख रुपये की ठगी की थी।
इस ऑपरेशन की सबसे चौंकाने वाली कड़ी सिविल लाइन थाने के एक पुराने मामले से जुड़ी है। पुलिस ने म्यूल यानी फर्जी बैंक खातों के मुख्य सिंडिकेट ऑपरेटर राजदीप सिंह भाटिया को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने 18 फर्जी बैंक खातों के जरिए करीब 10 करोड़ 76 लाख रुपये का अवैध ट्रांजेक्शन किया था। इन खातों में शेयर ट्रेडिंग, क्रिप्टो फ्रॉड और लॉटरी फ्रॉड जैसे कुल 88 साइबर अपराध लिंक थे, जिनकी रिपोर्ट देश के 17 अलग-अलग राज्यों में दर्ज है।”
“रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा ने इस बड़ी कामयाबी पर साइबर टीम की सराहना की है और साफ किया है कि साइबर ठगों के इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा। पुलिस अब इन आरोपियों के इंटरनेशनल लिंक्स और अन्य बैंक खातों को खंगालने में जुटी है ताकि ठगी की बाकी रकम भी बरामद की जा सके। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
प्रकरण 1 प्रार्थी सपन कुमार द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराया गया कि अज्ञात मोबाइल नंबर धारकों ने स्वयं को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर प्रार्थी के क्रेडिट कार्ड के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा मामला दर्ज होने की बात कहकर भयभीत किया। इसके बाद प्रार्थी को 24 घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जुड़े रहने के लिए मजबूर कर तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखते हुए उससे लगभग ₹1.25 करोड़ की धोखाधड़ी कर ली गई।
प्रकरण में थाना विधानसभा में अपराध क्रमांक 22/26 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान ठगी की राशि को विभिन्न लेयर के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाना पाया गया, जिसे चिन्हित कर तत्काल प्रभाव से होल्ड कराया गया। आगे की विधिक कार्यवाही करते हुए माननीय न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से ₹60 लाख की राशि लगभग पीड़ित को वापस कराई जा चुकी है। विवेचना के दौरान प्रकरण में संलिप्त मुख्य आरोपियों की पहचान की गई। आरोपी घटना के पश्चात लगातार अपना स्थान बदल रहे थे। गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम द्वारा प्रयास करते हुए आरोपी आर्यन सिंह दिल्ली को गिरफ्तार किया गया है। प्रकरण में पूर्व में भी एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।
प्रकरण 2 प्रार्थीया पुष्पा अग्रवाल द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि अज्ञात मोबाइल नंबर धारकों ने स्वयं को दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर प्रार्थीया के विरुद्ध सीबीआई में झूठा मामला दर्ज होने की बात कहकर भयभीत किया। इसके बाद प्रार्थीया को 24 घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जुड़े रहने के लिए मजबूर कर तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखते हुए उससे लगभग ₹42 लाख की धोखाधड़ी कर ली गई।
प्रकरण में थाना कोतवाली रायपुर में अपराध क्रमांक 201/25 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान प्रकरण में संलिप्त आरोपी की पहचान की गई। आरोपी घटना के पश्चात लगातार अपना स्थान बदल रहा था। उसकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम को कर्नाटका रवाना किया गया। पुलिस टीम द्वारा प्रयास करते हुए आरोपी जितेंद्र कुमार को हुबली कर्नाटका को गिरफ्तार किया गया। आरोपी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का कार्य करता है।
प्रकरण 3 थाना सिविल लाइन रायपुर में अपराध क्रमांक 44/25 धारा-317(2), 317(4), 317(5), 3(5) बीएनएस पंजीबद्ध किया गया था। उक्त अपराध में छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों के पीड़ितों के साथ 36 लाख रुपए की साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज है, जिसमें उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के 104 म्यूल अकाउंट और मोबाइल सिम संलिप्त हैं। उक्त अपराध की विवेचना रेंज साइबर थाना रायपुर में की जा रही है। विवेचना क्रम में पूर्व में म्यूल बैंक खातों का विश्लेषण कर अपराध में संलिप्त 92 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बैंक एवं मोबाइल सिम सर्विस प्रदाता कंपनियों से प्राप्त दस्तावेजों तथा गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आरोपी राजदीप सिंह भाटिया को पूर्व में गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों को माननीय न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपी
1 आर्यन सिंह पिता राजेश सिंह उम्र 22 वर्ष वर्तमान पता के आर मंगलम यूनिवर्सिटी गुड़गांव दिल्ली, स्थाई पता धूमनगंज इलाहाबाद उत्तरप्रदेश
2 जितेन्द्र कुमार पिता नागराज उम्र 33 वर्ष स्थायी पता- हुबली धारवाड़ कनार्टका
3 राजदीप सिंह भाटिया उर्फ यश भाटिया पिता बलजीत सिंह भाटिया उम्र 29 वर्ष पता डोंगरगढ़, राजनांदगांव
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