अश्लील वीडियो की धमकी, रहस्यमयी कॉल… पर सबूत ज़ीरो! हाईकोर्ट में खुला चौंकाने वाला सच
अश्लील वीडियो की धमकी, रहस्यमयी कॉल… पर सबूत ज़ीरो! हाईकोर्ट में खुला चौंकाने वाला सच
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पति-पत्नी के बीच चले विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और अश्लील वीडियो वायरल करने की अजीबोगरीब धमकी जैसे दावों की जांच के बाद एक बड़ा फैसला सामने आया है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि बिना सबूत क्रूरता साबित नहीं होती, और अगर किसी घटना को पति ने माफ कर दिया है, तो वह तलाक का आधार नहीं बन सकती।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी।
📌 मामला क्या था?
जांजगीर के युवक की शादी दिसंबर 2020 में मुंगेली की युवती से हुई थी। बेटी के जन्म के बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ा।
पति ने यह सनसनीखेज आरोप लगाया कि—
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तीन अंजान नंबरों से उसे गालियां दी गईं,
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पत्नी के कथित अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई,
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और मार्च 2023 में पत्नी घर छोड़कर चली गई।
पति ने अप्रैल 2023 में तलाक की अर्जी लगा दी।
📌 पत्नी का पलटवार
पत्नी ने सभी आरोपों को झूठा बताया और कहा—
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पति का अपने भाई से विवाद था,
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वे अलग रहना चाहते थे,
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उस पर आरोप सिर्फ उसे छोड़ने का बहाना हैं,
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और वह आज भी पति के साथ रहने को तैयार है।
📌 कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पाया कि—
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पति किसी भी आरोप का पुख्ता सबूत नहीं दे पाया,
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नवंबर 2022 से मार्च 2023 तक दोनों साथ रहे—मतलब पति ने कथित क्रूरता को माफ कर दिया,
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हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 23 (1)(b) के अनुसार, माफ की गई क्रूरता तलाक का आधार नहीं बनती।
इसलिए पति की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।