महात्मा ज्योतिबा फुले इंटरनेशनल स्किल सेंटर के विद्यार्थियों ने किया औद्योगिक भ्रमण

संस्थान के छात्र औद्योगिक भ्रमण के लिए मोहाली स्थित मालवा इंजीनियरिंग में पहुंचे
बाबैन: 23 अप्रैल । सांसद नवीन जिन्दल की पहल पर महात्मा ज्योतिबा फुले इंटरनेशनल स्किल सेंटर, के विद्यार्थियों के लिए मोहाली स्थित मालवा इंजीनियरिंग में एक शैक्षणिक एवं औद्योगिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस भ्रमण में कोपा, वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन तथा टीपीईएस ट्रेड के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस औद्योगिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण से परिचित कराना तथा उनके सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के बीच की दूरी को कम करना था। भ्रमण के दौरान छात्रों को आधुनिक इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की वेल्डिंग तकनीकों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इसके साथ ही उन्हें उद्योग में उपयोग होने वाली अत्याधुनिक मशीनों जैसे रोलिंग मशीन, डिश एंड मेकिंग मशीन, हाइड्रोलिक मशीन, लॉरी बैफल प्लेट मशीन तथा सीएनसी लेजर मशीन के संचालन और उपयोग से अवगत कराया गया।
भ्रमण के दौरान छात्रों को औद्योगिक कार्यों में कंप्यूटर की भूमिका के बारे में भी विस्तार से बताया गया। उन्हें कंप्यूटर एडेड डिजाइन (CAD) के मूल सिद्धांतों, डाटा एंट्री, डॉक्यूमेंटेशन, रिपोर्टिंग सिस्टम तथा सीएनसी मशीन प्रोग्रामिंग की प्रारंभिक जानकारी दी गई। साथ ही उत्पादन योजना और इन्वेंटरी मैनेजमेंट से जुड़े सॉफ्टवेयर के उपयोग के बारे में भी जानकारी साझा की गई। नवीन जिन्दल फाउंडेशन से कृष्मन सिंह सैनी ने बताया कि यह औद्योगिक भ्रमण अत्यंत इंटरैक्टिव और ज्ञानवर्धक रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस प्रकार के प्रयास विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता को बढ़ाने के साथ-साथ उनके रोजगार के अवसरों को भी सुदृढ़ करते हैं।
उन्होंने मालवा इंजीनियरिंग के प्रबंध निदेशक श्री अमृतपाल सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के सहयोग से विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलता है, जो उनके भविष्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
उन्होंने बताया कि नवीन जिन्दल फाउंडेशन की यह पहल युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें आत्मनिर्भर और उद्योग के लिए तैयार बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है।
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