गुजरात की खूबसूरती में सुकून की तलाश: काजल वशिष्ठ की शूटिंग के बाद ‘रोड टू हेवन’ की यात्रा

Kajal Vashisht: लंबी शूटिंग शेड्यूल्स खत्म करने के बाद अभिनेत्री काजल वशिष्ठ शहर की भागदौड़ से दूर जाकर गुजरात की रंगीन और शांत दुनिया में खुद को फिर से तलाशती हैं। उनके लिए गुजरात सिर्फ एक यात्रा स्थल नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और ऊर्जा से भर जाने की जगह है।
अहमदाबाद से लेकर पालनपुर और कच्छ तक — हर यात्रा उन्हें गुजरात की आत्मा के और करीब ले जाती है, जहाँ परंपरा, अपनापन और आध्यात्मिकता सहज रूप से एक-दूसरे में घुल-मिल जाते हैं।
आत्मा का उत्सव
अहमदाबाद में काजल खुद को शहर की त्योहारों भरी ऊर्जा में डुबो देती हैं। वह कहती हैं, “यहाँ एक अजीब-सी शांति और अपनापन महसूस होता है। गरबा, मंदिर, लोग — सब कुछ खुशी और भक्ति से भरा होता है।”
हाल ही में अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने वेदांत पब्लिक स्कूल और श्री सर्व गुजरात ब्रह्म समाज में आयोजित नवरात्रि उत्सव में हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने भक्तों के साथ मिलकर गरबा खेला और गुजरात के सबसे जीवंत त्योहार की धड़कन को महसूस किया।
उनकी अगली मंज़िल थी पालनपुर, जहाँ काजल ने स्थानीय लोगों के बीच और भी गहरा जुड़ाव महसूस किया। केसरिया गरबा, रंगत गरबा, और घूमर गरबा के दौरान उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ झूमकर नाच किया। वह मुस्कुराते हुए कहती हैं, “यहाँ का प्यार और ऊर्जा संक्रामक है — इसे महसूस किए बिना रह पाना असंभव है।”
‘रोड टू हेवन’: कच्छ की ओर
लेकिन कच्छ वह जगह है जो काजल का दिल सचमुच जीत लेती है। इसे वह अपनी “रोड टू हेवन” कहती हैं — एक ऐसा स्थान जहाँ खामोशी भी बोलती है।
वह याद करती हैं, “जब मैंने पहली बार कच्छ की यात्रा की, तो लगा जैसे किसी सपने में जा रही हूँ — सफेद रेगिस्तान की अनंतता, ठंडी हवा, और प्रकृति की नीरवता ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया।” रण ऑफ कच्छ की विशालता के बीच काजल को मिलता है सुकून — सोचने, साँस लेने और बस अपने आप में होने का एक मौका, जो उनके व्यस्त पेशेवर जीवन से एक प्यारा विराम है। वह कहती हैं, “गुजरात मुझे सकारात्मकता और शांति से भर देता है। यह वह जगह है जहाँ मैं खुद को रीसेट करती हूँ और नई शुरुआत के लिए तैयार होती हूँ।”
फुल स्टॉप और नई शुरुआत
काम और आत्म-संतुलन के इस खूबसूरत संगम के बीच, काजल अब अपनी आने वाली गुजराती फिल्म ‘फुल स्टॉप’ की रिलीज़ को लेकर भी उत्साहित हैं, जो इस नवंबर में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
काजल मुस्कुराते हुए कहती हैं, “इससे बेहतर समय नहीं हो सकता था। गुजराती होने के नाते, यह मेरे लिए बेहद खास पल है। मैं इस फिल्म का हिस्सा बनकर खुद को धन्य महसूस करती हूँ — यह मेरे लिए एक नई और खूबसूरत शुरुआत है।”
काजल वशिष्ठ के लिए, गुजरात सिर्फ एक स्थान नहीं — एक भावना है
अहमदाबाद की जीवंत गलियों से लेकर कच्छ के शांत रेगिस्तान तक, यह वह धरती है जहाँ उन्हें मिलता है सुकून, उद्देश्य और वह आंतरिक शांति, जो उन्हें अपनी अगली रचनात्मक यात्रा के लिए तैयार करती है।
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