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सफल हो गई जयशंकर की ईरान कूटनीति, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार कर सुरक्षित मुंबई पहुंचा भारत का तेल टैंकर

 

नई दिल्ली. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी भीषण जंग का असर पूरी दुनिया पर दिखने लगा है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz), जहां से तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, फिलहाल वह जंग का अखाड़ा बना हुआ है. यहां ताबड़तोड़ तेल के टैंकर डुबोए जा रहे हैं, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल के लिए हाहाकार मचा हुआ है. लेकिन, इन सबके बीच भारत ने एक सधी हुई कूटनीति का असंभव को भी संभव बना दिया है. दरअसल, भारत की कूटनीति से लाइबेरियाई झंडे वाला तेल टैंकर शेनलोंग (Shenlong), सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहा था, सुरक्षित रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है. बताते चलें कि मंगलवार यानी कि 10 मार्च को विदेशमंत्री एस जयशंकर ने ईरान के अपने समकक्ष अब्बास अराघची से बात की थी, जिसके बाद ही ये संभव हो सका है.

ये खबर इसलिए खास है क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भारत की ओर आने वाला यह पहला जहाज है जिसने मौत के मुहाने से निकलकर अपनी मंजिल तय की है. ईरान ने साफ कर दिया था कि अमेरिका और इजारयल के झंडे वाले तेल के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने नहीं देगा. लेकिन, लाइबेरियाई झंडे वाले तेल टेंकर का सऊदी से मुंबई पहुंचना भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है.

जयशंकर और अराघची की डील
इस मिशन की सफलता के पीछे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सक्रिय कूटनीति और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ हुई विस्तृत बातचीत है. जब ईरान ने घोषणा की थी कि वह चीन के अलावा किसी अन्य देश के जहाजों को हॉर्मुज से नहीं गुजरने देगा, तब जयशंकर ने मोर्चा संभाला. विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगलवार को ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर लंबी चर्चा की. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर विस्तार से बात हुई और वे लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं. सूत्रों के अनुसार, भारत ने ईरान के साथ अपनी ऐतिहासिक दोस्ती और रणनीतिक स्वायत्तता का हवाला देते हुए भारतीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की. जयशंकर ने इसी दिन जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी बात की, ताकि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट रहे.

बता दें कि यह विशाल टैंकर मुंबई बंदरगाह पर बुधवार दोपहर 1 बजे पहुंचा और शाम 6 बजे इसे ‘जवाहर द्वीप’ पर बर्थ किया गया. जहाज में 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल है. यह कच्चा तेल मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा. जहाज पर भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के कुल 29 क्रू सदस्य सवार हैं. मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के डिप्टी कंजर्वेटर प्रवीण सिंह ने पुष्टि की है कि जहाज ने तेल उतारना शुरू कर दिया है, जिसमें लगभग 36 घंटे लगेंगे.

28 भारतीय जहाज अब भी रडार पर
हालांकि ‘शेनलोंग’ सुरक्षित पहुंच गया है, लेकिन संकट अभी टला नहीं है. शिपिंग महानिदेशालय के अनुसार, 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज अब भी युद्ध क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं. भारत ने अपनी कूटनीति के जरिए अब तक देश महिमा, स्वर्ण कमल और विशवा प्रेरणा जैसे 7 जहाजों को अरब सागर के सुरक्षित जल क्षेत्र में पहुंचाया है.





















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