Raigarh:  ट्रैप कैमरे-थर्मल ड्रोन से हाथियों की निगरानी, दल के मूवमेंट पर नजर, कई स्थलों का किया जा रहा चिन्हांकन, हाथियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने बनाई रणनीति

रायगढ़ May 27, 2026 रिपोर्टर: raigarh top news
Raigarh:  ट्रैप कैमरे-थर्मल ड्रोन से हाथियों की निगरानी, दल के मूवमेंट पर नजर, कई स्थलों का किया जा रहा चिन्हांकन, हाथियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने बनाई रणनीति

Raigarh:  ट्रैप कैमरे-थर्मल ड्रोन से हाथियों की निगरानी, दल के मूवमेंट पर नजर, कई स्थलों का किया जा रहा चिन्हांकन, हाथियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने बनाई रणनीति

 

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में 17 दिनों के भीतर 3 हाथी शावकों की मौत होने से वन विभाग सकते में आ गया है। शावकों की सुरक्षा को लेकर विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए चिन्हित स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं।

वहीं थर्मल ड्रोन की मदद से मॉनिटरिंग की जा रही है। साथ ही ऐसे संवेदनशील जलाशयों को भी चिन्हित किया जा रहा है, जहां इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। धरमजयगढ़ वन मंडल में वर्तमान में कुल 135 हाथी मौजूद हैं। इनमें 45 नर, 70 मादा और 20 शावक शामिल हैं।

सबसे अधिक हाथियों का दल छाल रेंज के एडू परिसर में विचरण कर रहा है। यहां 62 हाथियों का समूह मौजूद है, जिसमें 9 शावक शामिल हैं।

डैम और तालाब में मिले थे शावकों के शव

वन विभाग के अनुसार हाल के दिनों में अलग-अलग घटनाओं में तीन हाथी शावकों के शव डैम और तालाबों में मिले थे। इन घटनाओं के बाद विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में 8 अलग-अलग स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा 3 थर्मल ड्रोन की मदद से सुबह और रात के समय हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

मौत के कारणों का पता लगाने की कोशिश

वन विभाग का कहना है कि ट्रैप कैमरे लगाने का उद्देश्य सिर्फ निगरानी करना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी है कि आखिर शावकों के शव लगातार पानी में क्यों मिल रहे हैं और उनकी मौत किन कारणों से हो रही है।

कई स्थलों का किया जा रहा चिन्हांकन

वन विभाग की ओर से हाथियों के नियमित विचरण वाले क्षेत्रों, तालाबों और जल स्रोतों का चिन्हांकन कर उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। विशेष रूप से ऐसे जलाशयों की पहचान की जा रही है, जहां छोटे हाथी शावकों के फंसने या दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

आवश्यकता के अनुसार ऐसे स्थलों पर सुरक्षित ढलान, पहुंच मार्ग और अन्य सुरक्षा उपाय विकसित किए जाएंगे, ताकि हाथियों का दल जल स्रोतों के आसपास सुरक्षित रह सके।

 

बताया जा रहा है कि पूरे वन मंडल में करीब 140 ट्रैकर तैनात हैं, जो सभी रेंज के अलग-अलग बीट क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। जरूरत पड़ने पर और रोस्टर के अनुसार उनकी ड्यूटी लगाई जाती है।

हालांकि जिन क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी है, वहां ट्रैकर नियमित रूप से हाथियों के दल के पीछे-पीछे चलकर निगरानी कर रहे हैं। ट्रैकर ग्रामीणों को सतर्क करने के साथ-साथ अधिकारियों को भी लगातार जानकारी दे रहे हैं। इसके अलावा प्रभावित गांवों में मुनादी कर लोगों को सावधान रहने की अपील की जा रही है।

 विशेष रणनीति पर किया जा रहा काम

धरमजयगढ़ वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आमामुड़ा तालाब में हाथी शावक की मौत की घटना बेहद दुखद है। शावक की मौत के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को सैंपल भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वनमंडलाधिकारी ने बताया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग विशेष रणनीति पर काम कर रहा है। हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए ट्रैप कैमरा, ड्रोन और थर्मल ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया है, ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि की समय पर जानकारी मिल सके और तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने बताया कि हाथी मित्र दल, ट्रैकर और वन अमले की संयुक्त टीमें लगातार मॉनिटरिंग में जुटी हुई हैं।

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