छत्तीसगढ़

CG में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर, 300 से ज्यादा सूअरों की मौत

भिलाई। दुर्ग जिले में सूअर पालन क्षेत्र से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां खतरनाक बीमारी अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ ) ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। जिले के मुडपार-नारधा गांव स्थित एक बड़े सूअर पालन फार्म में 300 से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है।
जांच में इस जानलेवा वायरस की पुष्टि होने के बाद प्रशासन और पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है। फार्म में लगातार हो रही सूअरों की मौत के बाद मालिक ने इसकी सूचना पशुपालन विभाग को दी।

रिपोर्ट में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि
विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सूअरों के सैंपल एकत्र कर उन्हें भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजा गया। सोमवार को आई रिपोर्ट में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि होते ही विभाग ने तत्काल एक्शन लिया।

80 से ज्यादा संक्रमित सूअरों को मारा गया
रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पशुपालन विभाग की टीम भारी संख्या में मौके पर पहुंची। अधिकारियों की मौजूदगी में 80 से अधिक संक्रमित सूअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया गया। इसके बाद शासन की गाइडलाइन के अनुसार सभी मृत सूअरों को फार्म के पास ही सुरक्षित तरीके से दफनाया गया, ताकि संक्रमण और न फैले।

 

300 से ज्यादा सूअरों की मौत, करोड़ों का नुकसान
फार्म संचालक पी.ओ. जाय के अनुसार, उनके फार्म में करीब 400 सूअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया था, जिसके बाद 1 अप्रैल से सूअरों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ। 6 अप्रैल तक 300 से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी थी। इस भारी नुकसान से फार्म संचालक को 1 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है।

प्रमुख सूअर पालन केंद्र है नारधा-मुडपार
नारधा-मुडपार क्षेत्र दुर्ग जिले का प्रमुख सूअर पालन केंद्र माना जाता है। यहां से न केवल दुर्ग-भिलाई बल्कि छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी सूअर मांस की सप्लाई की जाती रही है। ऐसे में इस बीमारी की पुष्टि के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।







केवल सूअरों में फैलता है यह वायरस
पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स के अनुसार, अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जो केवल सूअरों में फैलती है। यह एक संक्रमित सूअर से दूसरे सूअर में तेजी से फैलता है, लेकिन इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करता।

न इलाज, न वैक्सीन, नष्ट करना ही विकल्प
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बीमारी का अभी तक कोई प्रभावी इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि संक्रमण फैलने से रोकने के लिए संक्रमित और संदिग्ध सूअरों को नष्ट करना ही एकमात्र उपाय है।



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