Raigarh: वेदों के आध्यात्मिक दर्शन को ओडिसी नृत्य में साकार किया गुरु रीला होता एवं समूह ने

रायगढ़ September 19, 2026 रिपोर्टर: raigarh top news
Raigarh: वेदों के आध्यात्मिक दर्शन को ओडिसी नृत्य में साकार किया गुरु रीला होता एवं समूह ने

Raigarh: वेदों के आध्यात्मिक दर्शन को ओडिसी नृत्य में साकार किया गुरु रीला होता एवं समूह ने

रायगढ़, 19 सितम्बर 2026/ 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की छठवीं सांस्कृतिक संध्या में सुप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना एवं गुरु रीला होता एवं समूह ने ‘एकोऽहम् बहुस्याम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया। नृत्य, संगीत और भाव-अभिव्यक्ति के सुंदर समन्वय से सजी इस प्रस्तुति में वैदिक ज्ञान, भारतीय जीवन-दर्शन और आध्यात्मिक चेतना को प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया।

प्रस्तुति का आरंभ मंगलाचरण से हुआ, जिसमें अग्नि, जल और परमात्मा को समर्पित पावन स्तुति के माध्यम से सृष्टि के मूल तत्वों और दिव्य चेतना का भाव प्रस्तुत किया गया। इसके बाद गृहस्थ आश्रम के माध्यम से पारिवारिक जीवन, नारी सम्मान और सामाजिक सामंजस्य की अवधारणा को नृत्य के जरिए अभिव्यक्त किया गया। प्रस्तुति के अंतिम चरण में संन्यास एवं मोक्ष के माध्यम से जीवात्मा और परमात्मा के एकाकार होने की आध्यात्मिक यात्रा को साकार किया गया। ‘एकोऽहम् बहुस्याम्’ अर्थात् ‘मैं एक हूं और अनेक रूपों में व्यक्त हूं’ के वैदिक भाव ने पूरी प्रस्तुति को विशेष आध्यात्मिक गहराई प्रदान की।

गुरु रीला होता ने आठ वर्ष की आयु से योग और ओडिसी का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। वे ‘रेज ऑफ विजडम सोसाइटी’ की संस्थापक निदेशक हैं और ओडिसी नृत्य के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्हें संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ फेलोशिप सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। प्रस्तुति की अवधारणा, आलेख एवं नृत्य-रचना गुरु विजयलक्ष्मी होता की रही, जबकि संगीत में पद्म विभूषण पंडित राजन-साजन मिश्र एवं स्वरांश मिश्र का योगदान रहा।

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