एडिशन कलेक्टर गिरफ्तार, रह चुके हैं पूर्व मुख्यमंत्री के OSD, ईडी ने पीएससी घोटाले मामले में किया अरेस्ट
एडिशन कलेक्टर गिरफ्तार, रह चुके हैं पूर्व मुख्यमंत्री के OSD, ईडी ने पीएससी घोटाले मामले में किया अरेस्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ पीएससी घोटाले में ईडी की टीम ने बड़ी कार्रवाई की हैं। ईडी की टीम ने बलरामपुर -रामानुजगंज जिले के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। ईडी ने उन्हे धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत पकड़ा हैं। मालूम हो कि चेतन बोरघरिया वर्ष 2019 से 2022 के बीच कांग्रेस सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) के पद पर कार्यरत थे।
बताया जा रहा हैं कि एडिशन कलेक्टर को विशेष अदालत के समक्ष पेश किया। जहाँ से कोर्ट ने उन्हें 6 दिनों की ED रिमांड पर सौंप दिया है। ईडी की टीम पीएससी से जुड़े अनियमितता मामले में उनसे पूछताछ करेगी। दावा किया जा रहा हैं कि पूछताछ में घोटाले से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
PSC घोटाले को लेकर ED ने जारी किया था प्रेसनोट
छत्तीसगढ़ सीजीपीएससी घोटाले को लेकर 1 सितंबर को ईडी ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर में रेड मारी थी। इस दौरान ईडी ने उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया था। जांच में खुालासा हुआ हैं कि उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी के नाम पर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ से ज्यादा रूपए ऐंठे थे। साथ ही छात्रों को झांसे में लेने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री के PA-ओएसडी के नाम का भी इस्तेमाल किया था। नीचे पढ़ें ED के रायपुर ज़ोनल ऑफिस द्वारा जारी प्रेसनोट
”प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने 1 सितंबर को छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर ज़िलों में स्थित पांच जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई ‘मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002’ के प्रावधानों के तहत की गई। यह मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, प्रश्न-पत्र लीक और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
रिश्वत लेकर पेपर लीक
ED ने प्रेसनोट में बताया कि ”जांच से पता चला कि CGPSC परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र निजी दलालों के ज़रिए आरोपी व्यक्तियों के रिश्तेदारों और चुने हुए उम्मीदवारों को गैर-कानूनी पैसे (रिश्वत) के बदले लीक किए गए थे। इस तरह डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस जैसे वरिष्ठ सरकारी पदों पर धोखाधड़ी से चयन सुनिश्चित किया गया। आगे की जांच में पता चला कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 परीक्षा के लीक प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के उम्मीदवारों से नकद पैसे लिए और 3 करोड़ रुपये से ज़्यादा की ‘अपराध से हुई कमाई’ (Proceeds of Crime) जमा की।”
”इसमें से लगभग 2.80 करोड़ रुपये की रकम अनिल चंद्राकर को सौंपी गई थी। उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी के उम्मीदवारों को प्रभावित करने और उनसे पैसे वसूलने के लिए केके चंद्रवंशी (जो छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री के तत्कालीन पर्सनल असिस्टेंट और उनके मामा थे) और तत्कालीन मुख्यमंत्री के कार्यालय में तत्कालीन ‘विशेष कर्तव्य अधिकारी’ (OSD) के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया।”
3 जून को तलाशी
”ED ने पहले इस मामले में 3 जून 2026 को तलाशी ली थी। जमा किए गए सबूतों, PMLA, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, उनके मोबाइल फ़ोन से मिले डिजिटल सबूतों और उनके बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण के आधार पर यह साबित हुआ कि उत्कर्ष चंद्राकर जानबूझकर अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) से जुड़ी प्रक्रियाओं और गतिविधियों में शामिल थे।
इन गतिविधियों में कमाई करना, हासिल करना, कब्ज़ा रखना, छिपाना, लेयरिंग, ट्रांसफर, इस्तेमाल और इसे साफ़-सुथरी संपत्ति के तौर पर दिखाना शामिल है। इसके बाद, उन्हें PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत 1 सितंबर को गिरफ़्तार किया गया। तलाशी के दौरान दोषी ठहराने वाले दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ और जांच से जुड़े अन्य सबूत ज़ब्त किए गए। आगे की जांच चल रही है।”