गुजरात से आए दंपती को शादी के 12 वर्षों बाद एपेक्स में मिली जुड़वां बच्चों की सौगात
गुजरात से आए दंपती को शादी के 12 वर्षों बाद एपेक्स में मिली जुड़वां बच्चों की सौगात
गुजरात और राजस्थान में IVF के असफल प्रयासों के बाद रायगढ़ के एपेक्स हॉस्पिटल में पहली कोशिश में मिली सफलता
रायगढ़। संतान सुख की उम्मीद में करीब 12 वर्षों से संघर्ष कर रहे गुजरात के एक दंपती के जीवन में आखिरकार खुशियों ने दस्तक दी। गुजरात एवं राजस्थान में IVF उपचार के प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बाद दंपती ने रायगढ़ के एपेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं IVF सेंटर में उपचार कराने का निर्णय लिया। यहां IVF विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल, एम्ब्रियोलॉजिस्ट डॉ. अंजू अर्चना एवं IVF टीम के संयुक्त प्रयास से पहली ही IVF प्रक्रिया सफल रही और दंपती को जुड़वां पुत्रों की प्राप्ति हुई।
दंपती रायगढ़ निवासी ललित सोलंकी के रिश्तेदार हैं। लंबे समय तक अलग-अलग स्थानों पर उपचार और निराशा का सामना करने के बाद वे नई उम्मीद के साथ एपेक्स हॉस्पिटल पहुंचे।
यह मामला चिकित्सकीय दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण था। महिला का AMH बहुत कम था, जबकि पुरुष में *ग्लोबोजूस्पर्मिया (Globozoospermia) जैसी गंभीर शुक्राणु संबंधी समस्या थी। इसे देखते हुए डॉ. रश्मि गोयल ने सीधे IVF प्रक्रिया शुरू करने के बजाय पहले दंपती के गैमेट्स यानी अंडाणु एवं शुक्राणु की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दिया और उनकी स्थिति के अनुरूप विशेष उपचार प्रोटोकॉल तैयार किया।

कम AMH को देखते हुए एग पूलिंग (Egg Pooling) की रणनीति अपनाई गई। इसके बाद एम्ब्रियोलॉजिस्ट डॉ. अंजू अर्चना एवं IVF लैब टीम ने उपलब्ध अंडाणुओं और शुक्राणुओं पर सावधानीपूर्वक कार्य करते हुए अच्छी गुणवत्ता के भ्रूण तैयार किए। योजनाबद्ध उपचार और टीम के समन्वित प्रयासों से पहली ही IVF प्रक्रिया में गर्भधारण सफल रहा।
इस सफलता की सबसे खास बात यह रही कि तमाम चिकित्सकीय चुनौतियों के बावजूद दंपती को अपने ही अंडाणु और शुक्राणु से अपने आनुवंशिक संबंध वाले बच्चों के माता-पिता बनने का सुख प्राप्त हुआ।
खुशी का यह पल और भी खास तब बन गया, जब रक्षाबंधन के पावन दिन जुड़वां पुत्रों का जन्म हुआ। 12 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद आई इस दोहरी खुशी से परिवार के साथ गुजरात स्थित उनके गांव में भी उत्सव जैसा माहौल बन गया।
इस अवसर पर श्री ललित सोलंकी ने डॉ. रश्मि गोयल, डॉ. अंजू अर्चना एवं पूरी एपेक्स IVF टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कई जगह उपचार के बाद जब उम्मीद कम होती जा रही थी, तब रायगढ़ के एपेक्स हॉस्पिटल में उनके रिश्तेदारों को वह खुशी मिली, जिसका पूरा परिवार वर्षों से इंतजार कर रहा था।
डॉ. रश्मि गोयल ने बताया, “यह एक चुनौतीपूर्ण केस था। कम AMH और ग्लोबोजूस्पर्मिया को देखते हुए हमने पहले अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता पर काम किया। मरीज की स्थिति के अनुसार विशेष प्रोटोकॉल और एग पूलिंग की योजना बनाई गई। एम्ब्रियोलॉजिस्ट डॉ. अंजू अर्चना और हमारी IVF टीम के समन्वित प्रयासों से अच्छी गुणवत्ता के भ्रूण तैयार हुए और पहली ही IVF प्रक्रिया में सफलता मिली।”
उन्होंने कहा, “हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि 12 वर्षों से संतान की प्रतीक्षा कर रहा यह दंपती आज अपने ही आनुवंशिक संबंध वाले दो बच्चों का माता-पिता है। गुजरात से उम्मीद लेकर रायगढ़ आए इस परिवार को सफलता दिला पाना हमारी पूरी टीम के लिए बेहद संतोष और गर्व का विषय है।”
यह सफलता बताती है कि सही मूल्यांकन, व्यक्तिगत उपचार योजना, आधुनिक IVF तकनीक और अनुभवी IVF एवं एम्ब्रियोलॉजी टीम के बेहतर समन्वय से जटिल बांझपन के मामलों में भी सकारात्मक परिणाम की संभावना बनाई जा सकती है।