रायपुर। छत्तीसगढ़ में जन संस्कृति मंच के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच अब संगठन के भीतर बड़ा बदलाव और नई नियुक्तियों ने चर्चाओं का माहौल गर्म कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए पहले राज्य सम्मेलन के बाद जसम ने अपनी नई कार्यकारिणी और पदाधिकारियों का ऐलान किया, जिसमें कई बड़े नामों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस नियुक्ति में सबसे अहम फैसला लेखिका रूपेंद्र तिवारी को जसम छत्तीसगढ़ की पहली अध्यक्ष बनाए जाने का रहा। वहीं, जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय सचिव राजकुमार सोनी को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। बिलासपुर के लेखक और विचारक मुदित मिश्र को उप सचिव नियुक्त किया गया है।
संगठन ने अपने संरक्षक मंडल में भी कई चर्चित और प्रभावशाली नाम शामिल किए हैं। सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी चिंतक राजेश्वर सक्सेना, नंद कश्यप, आलोचक सियाराम शर्मा, जनकवि वासुकी प्रसाद उन्मत, कथाकार कैलाश बनवासी और जितेंद्र गढ़वी को संरक्षक बनाया गया है। इन नामों के जुड़ने से संगठन की वैचारिक दिशा को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वहीं, संगठन के विस्तार को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में भी पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। कवि हरगोविंद पुरी को मध्यप्रदेश जसम का समन्वयक और उपाध्यक्ष बनाया गया है। रायपुर, भिलाई और बिलासपुर से जुड़े अजय शुक्ला, घनश्याम त्रिपाठी और निहाल सोनी को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
सह-सचिव पद पर भी कई नाम सामने आए हैं, जिनमें रायपुर की सनियारा खान, भिलाई के सुरेश वाहने और बिलासपुर के योगेंद्र साहू शामिल हैं। कोषाध्यक्ष का दायित्व संस्कृतिकर्मी सुलेमान खान को सौंपा गया है। इसके अलावा सांस्कृतिक टीम में वर्षा बोपचे, सुनीता शुक्ला और समीक्षा नायर को शामिल किया गया है।
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जसम ने 35 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े साहित्यकारों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को जगह दी गई है। रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, अंबिकापुर, धमतरी, जांजगीर-चांपा और जगदलपुर जैसे क्षेत्रों से जुड़े नाम इस सूची में शामिल हैं।
इस बड़े विस्तार और नई टीम के गठन के बाद अब यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या जसम छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक और वैचारिक स्तर पर कोई बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है, या फिर यह सिर्फ संगठनात्मक मजबूती का कदम है। आने वाले समय में इसकी दिशा और प्रभाव पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।