Raigarh: राममय हुआ रायगढ़; शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब, 60 से अधिक समाजों ने मिलकर रचा नया इतिहास

कला और संस्कृति का अद्भुत संगम: पंजाब का बैंड, कालाहांडी का कटप्पा और कोलकाता के कलाकारों ने मोह लिया सबका मन
श्रद्धा और सेवा की मिसाल: गर्मी के बीच जगह-जगह लगा भंडारा, शीतल जल और महाप्रसाद से हुआ भक्तों का स्वागत
सुरक्षा के रहे चाक-चौबंद इंतजाम: चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस, ड्रोन और सीसीटीवी से हुई ऐतिहासिक भीड़ की निगरानी
रायगढ़। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर शुक्रवार शाम रायगढ़ पूरी तरह भक्ति और उल्लास में डूबा नजर आया। शहर में निकली भव्य शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और “जय श्रीराम” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। नटवर स्कूल मैदान से प्रारंभ हुई यह यात्रा देर रात रामलीला मैदान पहुंचकर महाप्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुई।


“राम जी की निकली सवारी, राम जी की लीला है न्यारी…” जी हां, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर आज रायगढ़ की सड़कों पर आस्था का जो सैलाब उमड़ा, उसने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। 27 मार्च की शाम रायगढ़ पूरी तरह से राममय नजर आया। नटवर स्कूल मैदान से शुरू हुई यह ऐतिहासिक शोभायात्रा जब शहर की गलियों से गुजरी, तो हजारों लोग इसके साक्षी बने। जय श्री राम के जयघोष से पूरा आकाश गुंजायमान हो उठा।

भगवान श्रीराम की शोभा यात्रा नटवर स्कूल प्रांगण से प्रारंभ होकर गांधी प्रतिमा तिराहा, एमजी रोड, रामनिवास टाकिज चौक, सिल्वर पैलेष तिराहा, गौरीशंकर मंदिर, न्यू मार्केट तिराहा, सुभाष चौक, गद्दी चौक, कोष्टापारा तिराहा, चांदनीचौक, गांजा चौक, हटरी चौक, सिटी कोतवाली, हण्डी चौक, घड़ी चौक होते हुए रामलीला मैदान पहुँची। शाम 6 बजे के बाद स्थिति यह थी कि शहर के मुख्य मार्ग पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने रूट डायवर्ट कर दिया था, लेकिन रामभक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। इस भव्य आयोजन में छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी, पूर्व विधायक विजय अग्रवाल, उमेश अग्रवाल और महापौर जीवर्धन चौहान समेत कई जनप्रतिनिधियों ने शामिल होकर भगवान राम का आशीर्वाद लिया।



इस वर्ष की शोभायात्रा में आकर्षण का केंद्र रहे देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार। पंजाब के पाइप बैंड की धुन ने तो अपना शानदार प्रदर्शन करते हुए लोगों का मन मोह लिया और ओडिशा के कालाहांडी से आए ‘कटप्पा’ नृत्य ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं कोलकाता से आए कलाकारों ने अपनी हास्य कलाओं और झांकियों से बच्चों और बड़ों, सबका मन मोह लिया। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान सुआ, पंथी और आदिवासी नृत्य की प्रस्तुतियों ने राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि बिखेरी। सड़कों पर युवाओं की रोमांचक अखाड़ेबाजी और डीजे की धुन पर थिरकते रामभक्तों ने उत्सव को और भी यादगार बना दिया।


रायगढ़ शहर की सड़कों पर भीड़ इतनी थी कि शाम को 6 बजे के बाद से ही जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई थी. झांकियां का प्रदर्शन देर रात तक चलता रहा. जिसमें हजारों लोग शामिल हुए. शोभायात्रा में जिला ही नहीं आस-पास से भी लोग बड़ी संख्या में शामिल होने पहुंचे थे. नटवर स्कूल मैदान से लेकर गौरीशंकर मुख्य मार्ग पर जन सैलाब नजर आ रहा था. हर तरफ जय श्री राम का नारा गूंज रहा था.


अलग-अलग स्थान से विशेष डीजे बुलाए गए थे. जो आकर्षण का केंद्र रहे. डीजे की धुन पर लोग नाच रहे थे.
बढ़ती गर्मी को देखते हुए शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने जगह-जगह भंडारे और प्याऊ लगाए थे। कहीं शीतल जल और नींबू पानी, तो कहीं दाल-चावल और शरबत का वितरण किया गया। 2014 में 54 समाजों के साथ शुरू हुआ यह सफर आज 60 से अधिक बिरादरी और संस्थाओं की एकजुटता का प्रतीक बन चुका है। देर रात रामलीला मैदान में महाप्रसाद के वितरण के साथ इस भव्य यात्रा का समापन हुआ।



चार पहिया एवं दो पहिया आवागमन मार्ग :
शाम 5 बजे से ही शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। सिर्फ बाइक सवारों को ही प्रवेश दिया जा रहा था।


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