फलोद्यान विभाग की सार्थक पहल ; छत्तीसगढ़ के महानगरों में “जशपुरिया स्ट्रॉबेरी” की मांग बढ़ने से किसान हो रहे हैं मालामाल.

जशपुर 25 फरवरी (रमेश शर्मा)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में इन दिनों किसानों के खेतों में स्ट्रॉबेरी की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है,
दरअसल,फलोद्यान विभाग का अमला ने जशपुर की अनुकूल जलवायु का लाभ दिलाने के लिए कार्यालयों में बैठ कर विभिन्न योजनाओं का प्रचार प्रसार के बजाए गांव गांव पहुंच कर वहां के किसानों से सतत सम्पर्क किया . इसी मेहनत के परिणाम स्वरूप जशपुर के पहाड़ी इलाकों की बंजर भूमि में फलोद्यान की व्यवसायिक खेती ने अपनी जगह बना ली है।
जशपुर उद्यान विभाग के सहायक संचालक करन सोनकर का कहना है कि कलेक्टर के मार्गदर्शन में यहां राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना को जमीनी स्तर पर उतारा गया। इससे किसानों ने नाशपाती, स्ट्राबेरी , लीची,आम के साथ चाय की खेती की व्यवसायिक पैदावार लेनी शुरू की। यही कारण है कि यंहा किसानों को धान की खेती से तुलना फलोद्यान की खेती अधिक लाभदायक साबित हो रही है,
जशपुर मे ग्राम जकबा के किसान राजेंद्र कुमार भगत का कहना है कि उन्हें धान से एक एकड़ में करीब 50 हजार रुपये, जबकि स्ट्रॉबेरी से 8-9 गुना ज्यादा फायदा मिल रहा है
जशपुर जिला हॉर्टिकल्चर फसलों को लेकर अब किसानों के लिए वरदान बन गया है। यहां के किसान स्ट्राबेरी, नाशपाती, सेव, आम लीची के साथ चाय की पैदावार से लाखों रुपये की अतिरिक्त आय लेने लगे है।
जशपुर उद्यान विभाग के सन्तोष बंजारा का कहना है कि जशपुर की ठंडी जलवायु से यंहा के जमीनी और पहाड़ी क्षेत्र में किसानों को विस्तृत समझाइश दी गई, उन्हें सरकार की योजनाओं से लाभान्वित कर इस फसल के अच्छी किस्म के पौधे उपलब्ध कराए गए। समय समय पर खाद पानी के अलावा समुचित देखरेख की गई। किसानों की रुचि और अच्छी मेहनत से उनके खेतों में लगी स्ट्रॉबेरी जैसी ठंडे मौसम वाली फसल का अब काफी सुखद नजारा देखने को मिल रहा है।
यहां की “जशपुरिया स्ट्रॉबेरी” अब पड़ोसी राज्य ओड़िशा के साथ छत्तीसगढ़ के महानगरों में पहुंच कर मेडिसिनल वैल्यू वाली लाल-लाल रसभरी फसल के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली है, स्ट्राबेरी फसल की बिक्री से यंहा के किसानों की आय मे भी कई गुना इजाफा हुआ है।
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