रायपुर के प्रतिष्ठित फिजिशियन डॉ. अनिमेष चौधरी ने देश के सबसे बड़े फिजिशियंस महासम्मेलन APICON 2026 में दिया महत्वपूर्ण योगदान

रायपुर। रायपुर के प्रतिष्ठित फिजिशियन डॉ. अनिमेष चौधरी ने देश के सबसे बड़े फिजिशियंस महासम्मेलन APICON 2026 में दिया महत्वपूर्ण योगदान
यह सम्मेलन Association of Physicians of India (API) द्वारा आयोजित 81वां वार्षिक सम्मेलन था, जो पटना, बिहार में 29 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में हुआ।
इस चार दिवसीय कार्यक्रम में पूरे भारत से लगभग 20,000 से अधिक डॉक्टरों ने भाग लिया, जहां 500 से अधिक वैज्ञानिक प्रस्तुतियां और सत्र आयोजित किए गए थे।
*डॉ. अनिमेष चौधरी का योगदान*
डॉ. अनिमेष चौधरी, जो रायपुर (छत्तीसगढ़) में जनरल मेडिसिन के कंसल्टेंट और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं (वर्तमान में श्री नारायण अस्पताल, रायपुर और अन्य संस्थानों से जुड़े), ने
“Thyroid Disorders in Pregnancy:
Current Evidence & Practical” (गर्भावस्था में थायरॉइड विकार*: (वर्तमान प्रमाण और व्यावहारिक दृष्टिकोण)
इस विषय पर उन्होंने अपनी विशेषज्ञता साझा की। सम्मेलन के वैज्ञानिक कार्यक्रम में उन्होंने “Thyroid & Pregnancy” पर एक प्रमुख व्याख्यान दिया, जो एंडोक्राइनोलॉजी और ऑब्स्टेट्रिक मेडिसिन से जुड़े सत्र का हिस्सा था। उन्होंने एक चर्चा में बताया कि यह उनके लिए एक बड़ा ही गर्व का विषय था जो इतने बड़े महासम्मेलन में उन्हें कहने का, अपने शोध के विषय को रखने का अवसर मिला।
यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड की समस्या सामान्य से अधिक जटिल हो जाती है। डॉ. चौधरी ने देश भर के फिजिशियंस को नवीनतम शोध, गाइडलाइंस और क्लिनिकल अपडेट्स पर विस्तृत जानकारी प्रदान की, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
गर्भावस्था में थायरॉइड समस्या क्यों जटिल है?
गर्भावस्था में थायरॉइड हार्मोन (T3, T4 और TSH) के स्तर में प्राकृतिक परिवर्तन आते हैं, लेकिन असंतुलन (हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथायरॉइडिज्म) होने पर गंभीर जोखिम बढ़ जाते हैं। मुख्य चुनौतियां निम्नलिखित हैं:
मां पर प्रभाव: थकान, वजन बढ़ना/घटना, उच्च रक्तचाप, प्री-एक्लेम्प्सिया, समय से पहले प्रसव, या गर्भपात का खतरा।
*बच्चे पर प्रभाव*:
यदि अनियंत्रित रहे तो बच्चे में मानसिक मंदता (cretinism), कम IQ, विकास में कमी, जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज्म, या न्यूरोडेवलपमेंटल समस्याएं हो सकती हैं। थायरॉइड हार्मोन बच्चे के मस्तिष्क विकास के लिए आवश्यक होते हैं, खासकर पहले ट्राइमेस्टर में।
*दवाओं की जटिलता*: इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं (जैसे लेवोथायरोक्सिन या एंटी-थायरॉइड दवाएं) मां और बच्चे दोनों को प्रभावित करती हैं। खुराक का सही संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि गर्भावस्था में थायरॉइड-बाइंडिंग ग्लोब्युलिन बढ़ जाता है और आवश्यकताएं बदलती हैं।
डॉ. चौधरी ने इन जटिलताओं को समझने, स्क्रीनिंग (जैसे TSH स्तर की नियमित जांच), ट्राइमेस्टर-विशिष्ट गाइडलाइंस (ATA या Endocrine Society के अनुसार), और सुरक्षित प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने नवीनतम प्रमाण-आधारित अपडेट्स साझा किए, जैसे:
गर्भावस्था में TSH लक्ष्य स्तर (ट्राइमेस्टर के अनुसार 0.1-2.5 mIU/L पहले ट्राइमेस्टर में)।
सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म का प्रबंधन।
एंटी-थायरॉइड दवाओं (PTU vs Methimazole) का चयन और जोखिम।
*इस सम्मेलन का महत्व*
APICON भारत के फिजिशियंस के लिए सबसे बड़ा मंच है, जहां नवीनतम मेडिकल एविडेंस, ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल और पब्लिक हेल्थ मुद्दों पर चर्चा होती है। इस वर्ष पटना में आयोजित होने से बिहार सहित पूरे पूर्वी भारत के डॉक्टरों को विशेष लाभ मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका उद्घाटन किया, और यह चिकित्सा शिक्षा, रिसर्च और पेशेवर नेटवर्किंग का प्रमुख अवसर था।
प्रांतीय अध्यक्ष, डॉ अशोक अग्रवाल ने डॉक्टर चौधरी को बधाई देते हुए कहा कि, यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि, समाज के डॉ. अनिमेष चौधरी का यह प्रस्तुतीकरण, छत्तीसगढ़ के चिकित्सा जगत के लिए गौरव की बात है, इस शोध से गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन में योगदान मिलेगा। यदि किसी भी व्यक्ति को थायरॉइड से संबंधित कोई व्यक्तिगत सलाह चाहिए, तो कृपया आप योग्य चिकित्सक से अवश्य परामर्श लें।
डॉ अशोक अग्रवाल
प्रांतीय अध्यक्ष
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