रायगढ़

Raigarh: भारत में आईवीएफ के जनक डॉ. सुभाष मुखर्जी की जयंती पर एपेक्स में विशेष जागरूकता कार्यक्रम

रायगढ़, 16 जनवरी। भारत में आईवीएफ (In Vitro Fertilization) तकनीक के प्रणेता डॉ. सुभाष मुखर्जी का जन्म 16 जनवरी 1931 को हजारीबाग, बिहार (वर्तमान झारखंड) में हुआ था। उन्होंने 3 अक्टूबर 1978 को भारत की पहली टेस्ट-ट्यूब बेबी कनुप्रिया अग्रवाल (दुर्गा) का सफल जन्म कराकर चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। डॉ. सुभाष मुखर्जी के इसी अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए आज उनकी जन्म जयंती के अवसर पर एपेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं एपेक्स आईवीएफ सेंटर द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम एपेक्स नर्सिंग, फार्मेसी एवं पैरामेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य इनफर्टिलिटी (बांझपन) जैसी गंभीर एवं संवेदनशील समस्या के कारणों, निवारण एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना था।

कार्यक्रम में आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल ने इनफर्टिलिटी के बढ़ते मामलों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज की बदलती जीवनशैली, तनाव, हार्मोनल असंतुलन, देर से विवाह, अस्वस्थ खानपान एवं पुरुष व महिला दोनों से संबंधित चिकित्सकीय कारण इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि समय पर सही जांच एवं उपचार से निःसंतानता की समस्या का समाधान संभव है।
वहीं एपेक्स आईवीएफ सेंटर की वरिष्ठ एम्ब्रियोलॉजिस्ट डॉ. अंजू अर्चना ने आईवीएफ प्रक्रिया को सरल एवं सहज भाषा में समझाते हुए भ्रूण निर्माण, लैब तकनीक, भ्रूण स्थानांतरण, सफलता दर एवं सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आज आईवीएफ उपचार पहले से अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी हो गया है।

इस अवसर पर एपेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. मनोज गोयल भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. सुभाष मुखर्जी ने जिस साहस एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भारत में आईवीएफ की नींव रखी, वह आज लाखों निःसंतान दंपत्तियों के लिए आशा की किरण बना हुआ है। उन्होंने इस प्रकार के शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों को स्वास्थ्य शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और इनफर्टिलिटी एवं आईवीएफ से संबंधित अपने प्रश्न विशेषज्ञों के समक्ष रखे, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा संतोषजनक एवं वैज्ञानिक ढंग से किया गया। सभी विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया तथा यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।



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