छत्तीसगढ़

23 साल बाद गूंजा फैसला, जग्गी हत्याकांड में सजा पर भी नहीं थमा गुस्सा, फांसी की उठी मांग

उम्रकैद के फैसले के बाद परिवार का बड़ा बयान, “न्याय अधूरा है”, पासपोर्ट जब्ती की भी उठी मांग


रायपुर। दो दशकों से ज्यादा समय तक अदालतों में चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आए फैसले ने एक बार फिर सियासी और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है। चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद भी पीड़ित परिवार का गुस्सा शांत नहीं हुआ है।

मृतक नेता के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को न्याय की जीत जरूर बताया, लेकिन साथ ही इसे अधूरा न्याय करार देते हुए बड़ा बयान दे दिया। उन्होंने साफ कहा कि अमित जोगी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए और उनका पासपोर्ट भी जब्त किया जाना चाहिए।

सतीश जग्गी ने कहा कि 23 वर्षों तक उनका परिवार न केवल कानूनी लड़ाई लड़ता रहा, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और मनी पावर जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इतने लंबे इंतजार के बाद मिला यह फैसला महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन अभी भी उन्हें पूरी न्याय की उम्मीद है।

दरअसल, यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से कुछ सरकारी गवाह बन गए थे। शुरुआती दौर में 2007 में ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य कई आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।

लेकिन बाद में मामला फिर से खुला और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें रमेश सिन्हा और अरविंद कुमार वर्मा शामिल थे, ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना कानून की नजर में गलत है। यही वजह रही कि इस केस को दोबारा खोलकर सुनवाई की गई।







इस फैसले के बाद अब एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में है। एक तरफ अदालत का सख्त फैसला है, तो दूसरी ओर पीड़ित परिवार की और कड़ी सजा की मांग—जिसने इस केस को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में इस मामले में सजा और कड़ी हो सकती है, या फिर यही फैसला अंतिम माना जाएगा। फिलहाल 23 साल पुरानी इस कहानी ने एक बार फिर न्याय, राजनीति और सच्चाई के बीच चल रही जंग को उजागर कर दिया है।



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