समान नागरिक संहिता पर महिलाओं की मुखर आवाज, लिव-इन पंजीयन अनिवार्य करने की दिये सुझाव, समान कानून और पैतृक संपत्ति में बराबरी की मांग

छत्तीसगढ़ October 12, 2026 • रिपोर्टर: raigarh top news
समान नागरिक संहिता पर महिलाओं की मुखर आवाज, लिव-इन पंजीयन अनिवार्य करने की दिये सुझाव, समान कानून और पैतृक संपत्ति में बराबरी की मांग

समान नागरिक संहिता पर महिलाओं की मुखर आवाज, लिव-इन पंजीयन अनिवार्य करने की दिये सुझाव, समान कानून और पैतृक संपत्ति में बराबरी की मांग

 

​रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। रायपुर जिले के धरसींवा और गरियाबंद जिले से आई विभिन्न महिला स्व-सहायता समूहों की पदाधिकारियों ने समान नागरिक संहिता (UCC) समिति के समक्ष अपनी राय रखते हुए व्यवस्था में व्यापक बदलाव की बात की । रायपुर में आयोजित समान नागरिक संहिता समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं के व्यावहारिक सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें रिपोर्ट में शामिल करने का आश्वासन दिया है।

​चर्चा के दौरान सीता साहू, बुद्धि साहू, टेमेश्वरी साहू, रेखा साहू और राजेश्वरी बाई जैसी स्व – सहायता समूह की महिला पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य होना चाहिए, जिससे महिलाओं के शोषण पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और इससे जन्मे बच्चों को पालन-पोषण तथा उत्तराधिकार का पूरा हक मिल सके। इस वैचारिक क्रम को आगे बढ़ाते हुए श्रीमती लक्ष्मी साहू, श्रीमती सुरेखा रात्रे, दिलेश्वरी मिर्ज़ा, कुमुदिनी चन्द्रवंशी और ममता साहू ने स्वतंत्रता, समानता और न्याय के अधिकार को सर्वाेपरि बताते हुए धर्म आधारित कानूनों में बदलाव की मांग की। उन्होंने पैतृक व व्यक्तिगत संपत्ति में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने और तलाक की प्रक्रिया को आपसी सहमति से सरल बनाने पर भी जोर दिया।

​समाज में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के सिलसिले में श्रीमती ममता यादव, डामीन विश्वकर्मा, विजयलक्ष्मी वैष्णव, ज्योति जोशी और पूर्णिमा बाई ने उपहार (दहेज) के नियम एक समान बनाने की पुरजोर वकालत की। चूंकि छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल प्रदेश है, इसलिए स्थानीय समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति का पूरा सम्मान करते हुए विचार-विमर्श करने पर सहमति जताई गई। इसी कड़ी में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए माधुरी निषाद, मिनी मार्कंडे, त्रिवेणी निषाद, यामिनी निर्मलकर और रेणुका निषाद ने कहा कि कानून का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए।

​ अंत में संध्या वर्मा, चंद्रकली, द्रोपदी बाई और भुनेश्वरी साहू ने एक स्वर में कहा कि श्एक राष्ट्र, एक कानूनश् की दिशा में आगे बढ़ते हुए सभी को अपनी परंपराएं मानने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और इसके लिए सबसे पहले महिलाओं का जागरूक होना सबसे अधिक आवश्यक है। समिति के सदस्यों ने महिलाओं की इस संवादात्मक पहल और स्पष्ट वैचारिक सहभागिता के सभी व्यावहारिक सुझावों को रिपोर्ट में प्रमुखता के साथ रखा जाएगा।

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