रायगढ़

Raigarh: महिला की गोली मारकर हत्या, सगे भाई-बहन को आजीवन कारावास, घरघोड़ा न्यायालय ने सुनाया फैसला

रायगढ़। बहुचर्चित गढ़ गोलीकांड मामले में घरघोड़ा न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सगे भाई-बहन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने अभियुक्त गोपाल यादव और अभियुक्ता लक्ष्मी यादव को दुरपती यादव की गोली मारकर हत्या करने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।





अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि घटना थाना लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम दियागढ़ की है। घटना की रात हरिराम यादव ने पुलिस को सूचना दी थी कि गांव में गोली चली है। सूचना मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी आर.एस. तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।

शिकायतकर्ता हरिराम यादव ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात वह अपने परिवार के साथ घर में सो रहा था, जबकि उसकी मां दुरपती यादव घर के बाहर खाट पर सोई हुई थीं। रात करीब 2 बजे पालतू कुत्ते के जोर-जोर से भौंकने पर वह और उसका भाई दशरथ जाग गए। जैसे ही वे दरवाजा खोलकर बाहर निकले, गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बाहर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि गोपाल यादव और एक विधि से संघर्षरत बालक उनकी मां को गोली मारकर मोटरसाइकिल से फरार हो रहे थे। गोली लगने से दुरपती यादव की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता हरिराम यादव और आरोपियों के परिवार के बीच लंबे समय से पुरानी रंजिश चली आ रही थी। हरिराम द्वारा गोपाल यादव की चचेरी बहन पदमा से प्रेम विवाह करने के बाद दोनों परिवारों के बीच विवाद बढ़ गया था। इसी बीच एक हत्या के मामले में हरिराम आरोपी बना था, जिससे दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी और गहरी हो गई। वहीं लक्ष्मी यादव और मृतिका दुरपती यादव के बीच भी अक्सर विवाद होता था तथा लक्ष्मी द्वारा जान से मारने की धमकियां देने की बात भी सामने आई।
विवेचना के दौरान पुलिस ने विधि से संघर्षरत बालक को लक्ष्मी यादव के घर से हिरासत में लिया। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि गोपाल यादव, लक्ष्मी यादव और बालक ने मिलकर दुरपती यादव की हत्या की साजिश रची थी। हत्या में प्रयुक्त भरमार बंदूक को घटना के बाद तोड़कर छिपा दिया गया था। पुलिस ने लक्ष्मी यादव के कब्जे से टूटी हुई भरमार बंदूक तथा बालक से एक रिवॉल्वर बरामद किया। वहीं गोपाल यादव को ओडिशा स्थित उसके ठिकाने से गिरफ्तार किया गया।

सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने गोपाल यादव और लक्ष्मी यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201, 120-बी, 212, 34 तथा आयुध अधिनियम की धारा 25 और 27(1) के तहत न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। विधि से संघर्षरत बालक का प्रकरण पृथक रूप से बाल न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी गवाहों के बयान और साक्ष्यों का परीक्षण किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने गोपाल यादव और लक्ष्मी यादव को हत्या एवं आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को हत्या और षड्यंत्र के अपराध में आजीवन कारावास, जबकि साक्ष्य छिपाने और अवैध हथियार रखने के अपराध में पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।







साथ ही गोपाल यादव पर 5 हजार रुपये तथा लक्ष्मी यादव पर 4 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। न्यायालय ने मृतिका दुरपती यादव के आश्रितों को एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से प्रदान किए जाने की भी अनुशंसा की है। इस चर्चित प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने पैरवी की।

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