सर्दियों में किस वक्त लें धूप, जिससे ज्यादा से ज्यादा मिले विटामिन डी? स्किन को भी नहीं होगा नुकसान

Sunlight For Vitamin D: विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है. इसके लिए सूरज की रोशनी में रहने के लिए बोला जाता है. लेकिन सवाल है कि आखिर दिन में कब सही से विटामिन डी मिलता है.
धूप को बेवजह नेचर की सबसे बड़ी देन नहीं कहा जाता. सूरज की गर्माहट और रोशनी शरीर को भीतर तक ऊर्जा देती है, और यही प्राकृतिक रोशनी कुछ ही मिनटों में आपके शरीर को वह विटामिन D देती है जो हड्डियों, मांसपेशियों, इम्यून सिस्टम और मूड सबको मजबूत रखने में अहम है.
हालांकि हमारी त्वचा धूप से विटामिन D बनाती है, लेकिन हर समय की धूप एक जैसी असरदार नहीं होती. ज्यादा देर तक तेज धूप में रहने से नुकसान भी हो सकता है, इसलिए यह समझना जरूरी है कि आखिर कौन-सा समय शरीर के लिए सबसे फायदेमंद है और कितना एक्सपोजर काफी है.
हालांकि हमारी त्वचा धूप से विटामिन D बनाती है, लेकिन हर समय की धूप एक जैसी असरदार नहीं होती. ज्यादा देर तक तेज धूप में रहने से नुकसान भी हो सकता है, इसलिए यह समझना जरूरी है कि आखिर कौन-सा समय शरीर के लिए सबसे फायदेमंद है और कितना एक्सपोजर काफी है.
आम धारणा के उलट, रिसर्च बताती है कि सुबह-सुबह नहीं, बल्कि 10 बजे से 3 बजे के बीच की धूप विटामिन D बनाने के लिए सबसे असरदार होती है. इस समय सूर्य ऊपर होता है, जिससे UVB किरणें सीधे त्वचा पर पड़ती हैं और विटामिन D तेजी से बनता है, जबकि सुबह 7 बजे जैसी धूप अक्सर बहुत हल्की होती है.
आम धारणा के उलट, रिसर्च बताती है कि सुबह-सुबह नहीं, बल्कि 10 बजे से 3 बजे के बीच की धूप विटामिन D बनाने के लिए सबसे असरदार होती है. इस समय सूर्य ऊपर होता है, जिससे UVB किरणें सीधे त्वचा पर पड़ती हैं और विटामिन D तेजी से बनता है, जबकि सुबह 7 बजे जैसी धूप अक्सर बहुत हल्की होती है.
कितनी देर धूप में रहना चाहिए, इसका एक ही जवाब सभी पर लागू नहीं होता. त्वचा का रंग, मौसम, जगह, उम्र, इन सब पर निर्भर करता है. कई एक्सपर्ट के मुताबिक हफ्ते में कुछ बार 5 से 30 मिनट तक चेहरे, हाथों या पैरों पर धूप पड़ना काफी होता है, जबकि गहरी त्वचा और बुजुर्गों को ज्यादा समय की जरूरत होती है.
कितनी देर धूप में रहना चाहिए, इसका एक ही जवाब सभी पर लागू नहीं होता. त्वचा का रंग, मौसम, जगह, उम्र, इन सब पर निर्भर करता है. कई एक्सपर्ट के मुताबिक हफ्ते में कुछ बार 5 से 30 मिनट तक चेहरे, हाथों या पैरों पर धूप पड़ना काफी होता है, जबकि गहरी त्वचा और बुजुर्गों को ज्यादा समय की जरूरत होती है.
सर्दियों में और ऊंचाई वाले इलाकों में सूर्य की किरणों का एंगल बदल जाता है, जिससे दोपहर की धूप भी कई बार विटामिन D बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होती. ऐसे समय में लोगों को भोजन और सप्लीमेंट पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है, क्योंकि UVB किरणें जमीन तक पहुंच ही नहीं पातीं.
सर्दियों में और ऊंचाई वाले इलाकों में सूर्य की किरणों का एंगल बदल जाता है, जिससे दोपहर की धूप भी कई बार विटामिन D बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होती. ऐसे समय में लोगों को भोजन और सप्लीमेंट पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है, क्योंकि UVB किरणें जमीन तक पहुंच ही नहीं पातीं.
धूप का फायदा उठाने का सबसे सुरक्षित तरीका है, कम समय का एक्सपोजर, वह भी दोपहर के आसपास. लंबे समय तक सूर्य में रहने पर सनबर्न का जोखिम बढ़ता है, जो आगे चलकर स्किन कैंसर जैसे खतरे ला सकता है. अगर आपको पता है कि आपको ज्यादा देर बाहर रहना है, तो सनस्क्रीन, टोपी और कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए.
धूप का फायदा उठाने का सबसे सुरक्षित तरीका है, कम समय का एक्सपोजर, वह भी दोपहर के आसपास. लंबे समय तक सूर्य में रहने पर सनबर्न का जोखिम बढ़ता है, जो आगे चलकर स्किन कैंसर जैसे खतरे ला सकता है. अगर आपको पता है कि आपको ज्यादा देर बाहर रहना है, तो सनस्क्रीन, टोपी और कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए.
एक और बात याद रखें, कांच के पीछे बैठकर धूप में रहने से विटामिन D नहीं बनता, क्योंकि UVB किरणें खिड़कियों से सीधे अंदर नहीं आतीं. इसलिए धूप लेने का मकसद हो तो कुछ समय खुली जगह में रहना जरूरी है. और हां, सनस्क्रीन का इस्तेमाल विटामिन D को पूरी तरह बंद नहीं करता, यह सिर्फ सुरक्षा देता है, इसलिए धूप में लंबे समय रहना हो तो इसे लगाना ही चाहिए.
एक और बात याद रखें, कांच के पीछे बैठकर धूप में रहने से विटामिन D नहीं बनता, क्योंकि UVB किरणें खिड़कियों से सीधे अंदर नहीं आतीं. इसलिए धूप लेने का मकसद हो तो कुछ समय खुली जगह में रहना जरूरी है. और हां, सनस्क्रीन का इस्तेमाल विटामिन D को पूरी तरह बंद नहीं करता, यह सिर्फ सुरक्षा देता है, इसलिए धूप में लंबे समय रहना हो तो इसे लगाना ही चाहिए.
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