वेदांता पावर प्लांट हादसा अपडेट: जिला प्रशासन ने दिए घटना के मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, कांग्रेस ने भी बनाई जांच समिति…
बॉयलर ब्लास्ट के बाद बढ़ा सियासी और प्रशासनिक दबाव, जिम्मेदार कौन—तकनीकी गलती या मानवीय लापरवाही?

रायपुर: सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भयावह बॉयलर हादसे के बाद अब सच सामने लाने की कवायद तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं, जिससे आने वाले 30 दिनों में इस पूरे हादसे के पीछे की असल वजह सामने आ सकती है।
कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने डभरा एसडीएम को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के लिए आठ अहम बिंदु तय किए गए हैं, जिनमें सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर घटना कब और कैसे हुई और उस समय मौके पर कौन-कौन मजदूर मौजूद थे। साथ ही मृतकों और घायलों की पूरी जानकारी भी जुटाई जाएगी।
जांच का दायरा सिर्फ घटना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन परिस्थितियों को भी खंगाला जाएगा जिनके चलते यह हादसा हुआ। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में है—प्लांट शुरू होने के बाद से अब तक कितनी बार निरीक्षण हुआ, क्या खामियां पाई गईं और उन पर क्या कार्रवाई की गई, यह भी सामने लाया जाएगा।

सबसे अहम पहलू यह होगा कि हादसे की असली वजह क्या थी—तकनीकी खराबी या मानवीय लापरवाही? साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार कौन है। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए भी जांच अधिकारी से ठोस सुझाव मांगे गए हैं।
इधर, इस हादसे ने सियासी रंग भी ले लिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी अपनी जांच समिति गठित कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में 9 सदस्यीय टीम बनाई गई है, जो पीड़ित परिवारों से मिलकर जमीनी हकीकत का जायजा लेगी।
इस समिति में कई वरिष्ठ नेता और विधायक शामिल किए गए हैं, जो सीधे प्रभावित इलाकों में जाकर हालात समझेंगे और अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। प्रशासनिक जांच के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी सच्चाई तलाशने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 30 दिन बाद सामने आने वाली रिपोर्ट इस हादसे के पीछे छिपे हर सच को उजागर कर पाएगी, या फिर यह मामला भी बाकी हादसों की तरह फाइलों में सिमट कर रह जाएगा?
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