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कभी टेलीकॉम सेक्‍टर पर राज करती थी यह कंपनी, आज 2 लाख करोड़ का बकाया, सरकार से चाहती है 78000 करोड़ की राहत

ई दिल्‍ली. याद कीजिए 2010 वाले दशक को जब देश के टेलीकॉम सेक्‍टर में बीएसएनएल को सिर्फ एक ही प्राइवेट कंपनी टक्‍कर देती थी. हचिंसन एस्‍सार ने भारत में टेलीकॉम सर्विस साल 1994 में शुरू की थी और साल 2007 में इसे वोडाफोन समूह ने खरीद लिया, जिसके बाद नाम बदलकर वोडाफोन-एस्‍सार लिमिटेड हो गया.

तब बीएसएनएल के बाद ज्‍यादातर लोगों के पास इसी कंपनी की सर्विस होती थी. बाद में आइडिया और वोडाफोन का मर्जर हो गया और एक नई कंपनी वोडा-आइडिया तैयार हुई, जो आज भी सेवाएं देती है. लेकिन, आज इस कंपनी पर 2 लाख करोड़ से ज्‍यादा का बकाया है, जिसमें से 78 हजार करोड़ के लिए सरकार से राहत पाने की उम्‍मीद लगाए बैठी है.

फिलहाल कर्ज में डूबी वोडाफोन आइडिया (वीआई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिजीत किशोर ने कहा कि कंपनी सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है और उसे उम्मीद है कि वह 78,500 करोड़ रुपये के समायोजित सकल राजस्व बकाया के लिए सर्वश्रेष्ठ और दीर्घकालिक समाधान निकाल लेगी. किशोर ने कहा कि कंपनी धन जुटाने के लिए बैंकों एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों सहित कई स्रोतों से संपर्क कर रही है जो दीर्घकालिक वित्तपोषण के लिए समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) मामले के समाधान पर भी निर्भर करता है.

बैंकों से कर्ज लेने की तैयारी
सीईओ ने कहा कि हम उस समाधान की तलाश में हैं जो सबसे सही और सरकार के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप हो. हमारा मानना ​​है कि चूंकि उच्चतम न्यायालय का आदेश हाल ही में आया है इसलिए बैंकों को दीर्घकालिक वित्तपोषण के लिए उस पर थोड़ी निर्भरता होगी. सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को वित्तवर्ष 2016-17 तक की अवधि के लिए उठाए गए अतिरिक्त एजीआर मांग के संदर्भ में पुनर्विचार करने और उचित निर्णय लेने की अनुमति दी है. साथ ही ब्याज व जुर्माना सहित सभी एजीआर बकाया का व्यापक रूप से पुनर्मूल्यांकन और समाधान करने की भी अनुमति दी है.

अभी बैंकों का कितना लोन
किशोर ने कहा कि सितंबर 2025 के अंत तक कंपनी की एजीआर देनदारी लगभग 78,500 करोड़ रुपये थी. 30 सितंबर 2025 तक वीआई का बैंकों से बकाया ऋण (अर्जित लेकिन देय नहीं ब्याज सहित) 15.42 करोड़ रुपये है. स्पेक्ट्रम के लिए आस्थगित भुगतान दायित्व (अर्जित लेकिन देय नहीं, ब्याज सहित) है जो वित्त वर्ष 2043-44 तक के वर्ष में देय है और एजीआर जो वित्त वर्ष 2030-31 तक के वर्षों में देय है कुल मिलाकर 2,01,409 करोड़ रुपये है.

कंपनी को हजारों करोड़ का घाटा
एक तरफ तो कंपनी पर मोटा बकाया है और दूसरी तरफ लगातार घाटे में भी चल रही है. वीआईएल (वोडाफोन आइडिया लिमिटेड) को चालू वित्तवर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 12,132 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है और 30 सितंबर तक इसकी निवल संपत्ति नकारात्मक 82,460 करोड़ रुपये थी. इसका मतलब है कि कंपनी की बाजार पूंजी अभी निगेटिव में चल रही है. यानी बकाया और कर्ज ज्‍यादा और कंपनी की कीमत कम.



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