कोरबा: यात्री प्रतीक्षालय बना आख़िरी ठिकाना… कड़ाके की ठंड ने ले ली बुजुर्ग की जान, 28 दिन में तीसरी मौत से दहशत
रात की ठिठुरन में पैदल लौटते समय रुके थे, सुबह मिली लाश—छत्तीसगढ़ में शीतलहर का कहर जारी

कोरबा। छत्तीसगढ़ में ठंड अब सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि जानलेवा खतरा बनती जा रही है। राज्य में 28 दिनों के भीतर ठंड से तीसरी मौत का मामला सामने आया है। कोरबा जिले के सरईसिंगार निवासी हरप्रसाद भैना (55) की लाश कसईपाली के यात्री प्रतीक्षालय में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।
🚶♂️ छठी कार्यक्रम से लौटते वक्त थकान और ठंड ने घेरा
जानकारी के अनुसार, हरप्रसाद भैना मंगलवार को रलिया गांव में छठी कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम के बाद वे पैदल ही अपने घर लौट रहे थे।
रात गहराने के साथ ठंड और थकान बढ़ती चली गई। इसी दौरान उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले यात्री प्रतीक्षालय में आराम करने का फैसला किया।
लेकिन किसी को क्या पता था कि
👉 यही विश्राम उनकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा।
☠️ सुबह दिखा खौफनाक मंजर, लोगों ने पुलिस को दी सूचना
बुधवार सुबह जब स्थानीय लोग प्रतीक्षालय पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर सिहर उठे।
हरप्रसाद भैना निश्चल अवस्था में पड़े थे। काफी देर तक कोई हलचल न होने पर पुलिस को सूचना दी गई।
शव की स्थिति और मौके की परिस्थितियों को देखकर
👉 ठंड से मौत की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
🪪 जेब में मिले पर्स से हुई पहचान
मृतक की पहचान उनकी जेब से मिले पर्स के जरिए हुई, जिस पर
हरप्रसाद भैना, सरईसिंगार
लिखा हुआ था।
परिजनों ने किसी भी तरह की शंका या साजिश से इनकार किया है।
❄️ अंबिकापुर के बाद अब कोरबा, ठंड से लगातार मौतें
इससे पहले
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अंबिकापुर में ठंड से दो लोगों की मौत हो चुकी है
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अब कोरबा की यह घटना तीसरा मामला है
लगातार हो रही मौतों ने प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
🌡️ अभी और बढ़ेगा खतरा! मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले 3 दिनों तक
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छत्तीसगढ़ के उत्तरी और मध्य हिस्सों में
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कई जगहों पर शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की है
ठंड का आलम यह है कि—
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कई शहरों का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया है
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उत्तरी छत्तीसगढ़ में असर सबसे ज्यादा
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मैनपाट में न्यूनतम तापमान सिर्फ 1.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया
⚠️ अब सवाल ये है…
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क्या ठंड से होने वाली मौतों का सिलसिला थमेगा?
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क्या प्रशासन ठंड से बचाव के लिए और ठोस कदम उठाएगा?
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और कितनी जानें जाएंगी, तब जागेगा सिस्टम?
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